24orai01उरई। समाजवादी पार्टी जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव को लेकर कहीं पर निगाहें, कहीं पर निशाना की रणनीति अपनाये हुए है। पार्टी ने योजनाबद्ध ढंग से भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों का जमीर ललकारना शुरू करके उन्हें बैकफुट पर खड़ा कर दिया है। समाजवादी पार्टी की पूरी रणनीति का संचालन जिले की राजनीति में नये चाणक्य बनकर उभरे पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी पर्दे के पीछे से संभाले हुए है। हालांकि सामने से मोर्चा संभालने की जिम्मेदारी सपा के जिलाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह यादव संभाले हुए हैं। दरअसल समाजवादी पार्टी के लिए असली खतरा सुमन निरंजन का पर्चा वापस न होने पर उनसे है जबकि रणनीति के तहत अनुरागी द्वारा जाहिर चुनौती भाजपा को दिलाई जा रही है तांकि सुमन निरंजन के पक्ष में भाजपा के सदस्यों के ध्रुवीकरण की कोई गुंजाइश न रह जाये। दूसरी ओर बाबूराम एमकाम के निधन के बाद भाजपा में कोई ऐसा पैतरेबाज नेता नही बचा जो प्रतिद्वंदी खेमे के लिए मुसीबत पैदा कर सके। इसलिए अनुरागी द्वारा फेंकी गई कमंद के चलते भाजपा के नेता सोच में पड़कर किंकर्तव्यविमूढ़ जैसे हो गये हैं।
जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव की तस्वीर असली तौर पर 26 अगस्त को नाम वापसी के दिन साफ होगी। समाजवादी पार्टी संध्या मौखरी और सुमन निरंजन का पर्चा वापस कराने के लिए कोई कोरकसर नही छोड़ रही। सपा के जिलाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह यादव को पूरा भरोसा है कि व्यक्तिगत संबंधों के आधार पर वे संध्या मौखरी का पर्चा वापस कराने में सफल हो जायेंगे। लेकिन सुमन निरंजन का पर्चा वापस होगा या नही इसे लेकर पार्टी आश्वस्त नही है। भले ही समाजवादी पार्टी सुमन निरंजन की प्रत्याशिता को लेकर भाजपा के एक प्रदेश पदाधिकारी की घेराबंदी कर रही हो लेकिन सुमन निरंजन के पीछे समाजवादी पार्टी का ही एक प्रभावशाली खेमा है यह असलियत किसी से छुपी नही है।ं इसके कारण सपा खेमे को भितरघात के अंदेशें से जूझना पड़ रहा है।
सुमन निरंजन के पीछे सपा के अपने ही लोग जो खेल खेल रहे हैं उसमें भाजपा के सदस्यों की बड़ी भूमिका है। अगर भाजपा के सदस्य सपा को नीचा दिखाने के नाम पर सुमन निरंजन के साथ लामबंद हो गये तो सपा प्रत्याशी आसना खातून का खेल खराब हो जायेगा। दूसरी ओर अगर यह तय हो जाये कि भाजपा के सदस्यों का वोट सुमन निरंजन को मिलने की कोई संभावना नही है तो हो सकता है कि किरकिरी से बचने के लिए सुमन निरंजन भी नाम वापसी के दिन मैदान से हट जायें। घनश्याम अनुरागी ने सुमन निरंजन की आड़ में हो रही व्यूह रचना को तोड़ने के लिए जो पासा फेका है भाजपा के नेताओं को उसका कोई तोड़ नही सूझ रहा।
समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह यादव अनुरागी की योजना के तहत मंगलवार को भाजपा के खिलाफ पत्रकार वार्ता की। इसमें उन्होंने भाजपा सदस्यों पर हमला बोलते हुए कहा कि वे फरहा नाज के चुनाव के समय भी बिक गये थे और इस बार भी वे सौदेबाजी के लिए घूम रहे हैं। हालत यह है कि आखिर में भाजपा की प्रत्याशी तक अपना वोट बेंच देगीं। इस लांछन से जहां एक ओर भाजपा नेता और सदस्य तिलमिला गये हैं वहीं उन्हें अपनी इज्जत बचाने की भी पड़ गई है। जिसके कारण सुमन निरंजन के पक्ष में धु्रवीकरण की व्यूह रचना को जबर्दस्त धक्का लगा है।
समाजवादी पार्टी के आरोप को झूठा साबित करने के लिए भाजपा के सामने अपनी प्रत्याशी अर्चना गौतम के पक्ष में पूरे चारों वोट डलवाने का इतना ज्यादा दबाव बन गया है कि अनुरागी के इस शिकंजे से अपने को आजाद करने का कोई चारा भाजपा के नेताओं को नही सूझ रहा। भाजपा के सदस्यों में पूर्व विधायक संतराम सिंह सेंगर के सुपुत्र पुष्पेंद्र सेंगर भी शामिल हैं। सपा के आरोपों के चलते पुष्पेंद्र का वोट तो भाजपा से टस से मस होने की कोई स्थिति ही नही बची है। सपा की घेराबंदी ऐसी है कि जिसमें भाजपा के नेता इतनी बुरी तरह फंस गये है कि अब उनके लिए अर्चना का पर्चा वापस कराने का भी रास्ता नही बचा है। भाजपा के चुनाव का सारा दारोमदार सांसद होने के कारण बड़ा चेहरा माने जा रहे भानुप्रताप वर्मा पर है जो खुद भगवान भरोसे चुनाव जीतते रहे हैं। जिसकी वजह से पैतरेबाजी की राजनीति में अनुरागी के मुकाबले वे कहीं नही ठहर पा रहे। उधर भाजपा के जिस प्रदेशीय नेता की तरह अनुरागी ने इशारा करवाया है उनके सपा के उस खेमे से बहुत नजदीकी संबंध हैं। जिस खेमे की भूमिका सुमन निरंजन को उम्मीदवारी में प्रमुख मानी जा रही है। इस तार के जुड़े होने से पूरे आसार थे कि भाजपा के प्रदेशीय पदाधिकारी सपा को नीचा दिखाने के नाम पर सुमन के लिए आखिरी क्षणों में पार्टी के सदस्यों का समर्थन करा देते लेकिन सपा ने यह धारणा बना दी है कि भाजपा के प्रदेशीय पदाधिकारी पर भी खरीद फरोख्त का जादू चल रहा है। ऐसे में भाजपा के उक्त पदाधिकारी को भी जनमानस के बीच अपना चेहरा मटमैला न होने देने के लिए पार्टी प्रत्याशी के लिए ही पूरा जोर लगाने की मजबूरी बन गई है। बहरहाल जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव का परिदृश्य बेहद दिलचस्प और रोमांचक बन गया है। 26 अगस्त को नाम वापसी के दिन क्या होता है इस पर लोगों की निगाहें जमी हुई हैं।

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