0 तीन दिवसीय मानस एवं भागवत सम्मेलन के अंतिम दिवस कई संतों ने दिये प्रवचन
konch1 konch2कोंच-उरई। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर विगत बर्षों की भांति इस बर्ष भी सेठ अमरचंद्र एवं जसोदादेवी की पुण्य स्मृति में त्रिदिवसीय मास एवं भागवत सम्मेलन में आज कई संतों ने परमात्मा की महिमा का बखान करते हुये परमात्मा के अवतरण को कल्याणकारक बताया। चित्रकूट कामदगिरि पीठाधीश्वर प्रख्यात संत रामानंदाचार्य रामस्वरूपाचार्य महाराज ने कहा कि कृष्ण केवल भारत के नहीं अपितु समस्त विश्व के हैं, उन्हें सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता है, वे विश्वगुरु हैं। कृष्णं वंदे जगद्गुरुं अर्थात् कृष्ण समस्त संसार के गुरु हैं और आज समूचा विश्व इस आनंददायी उत्सव को मना रहा है।
नगर पालिका के समीप स्थित कामतानाथ मोटर्स कैम्पस में संयोजित प्रवचनमाला में संतश्रेष्ठ रामस्वरूपाचार्य जी कहते हैं कि जब कारागार में भगवान का प्राकट्य हुआ तो माता यशोदा और वसुदेव ने उनसे अनुनय की कि वे उनके लिये कुछ भी कर सकने की स्थिति में नहीं हैं क्योंकि वह बंधनों में बंधे हैं। तब परमात्मा कहते हैं कि वे उन्हें अपने सिर पर धारण कर लें, सारे बंधन कट जायेंगे। कहने का तात्पर्य यह है कि जिसने परमात्मा को धारण कर लिया वह सभी बंधनों से स्वतरू ही मुक्त हो जाता है। उन्होंने कहा कि परमात्मा पापियों और पापों का शमन करने तथा धर्म की स्थापना के लिये तो अवतार धारण करते ही हैं, उनके अवतार धारण करने का सबसे बड़ा कारण भक्तों को दर्शन देकर आनंदित करना ही है। कारागार में प्रकट होकर भगवान ने उसे करुणागार बना दिया। जैसे ही उनका अवतरण होता है, कारागार के सारे रक्षक निद्रा में लीन हो जाते हैं, इसका सीधा सा आशय है कि जब परमात्मा आता है तो जीव सुसुप्त अवस्था में चला जाता है और उनका दर्शन लाभ नहीं प्राप्त कर पाता, जबकि माया के आते ही जीव चैतन्य हो जाता है और माया मोह में फंस कर परमात्म प्राप्ति से दूर हो जाता है। मानस मर्मज्ञ रामकृपाल दास ने गुरु महिमा का बखान करते हुये कहा कि ईश्वर से केवल गुरु ही मिला सकता है, गुरु मनुष्य के रूप में भले ही दिखाई देता हो लेकिन वह ईश्वर के अति निकट होता है। संतों का तो यहां तक कहना है कि गुरु रूप में साक्षात् परमात्मा ही जीव का कल्याण करते हैं। संत महावीर ब्रह्मचारी ने अपने उद्बोधन में विवेक और अविवेक की बहुत ही सुंदर व्याख्या करते हुये कहा कि आज के समय में जीव के अविवेक के कारण ही घटनायें घट रहीं हैं, सत्संग और गुरुवाणी के द्वारा ही जीव को विवेक की प्राप्ति हो सकती है। उन्होंने कहा कि कल्याण का मार्ग बताने बाला भी गुरु सदृश ही होता है। मानस मयंक ब्रजेशदास अयोध्या, विनोद पाठक आदि ने भी जीव कल्याण के मार्ग बताये, संचालन मानस मर्मज्ञ संतोष गौतम ने किया। अंत में आयोजक अनिल माहेश्वरी ने भगवान श्री कृष्ण की आरती उतारी और प्रसाद वितरित किया गया। इस दौरान कृष्णदास, ओंकारदास, बसंतकुमार, अंशुल, प्रियांशु, कृष्णकुमार शर्मा, नरोत्तम स्वर्णकार, चंद्रशेखर नगाइच, रामप्रकाश पडरी, संतोष त्रिपाठी, मुन्नालाल गर्ग, राजा अनंतराम नक्टेला, शंकरलाल खिल्ली, छुन्ना निरंजन, पंचम गोरा आदि मौजूद रहे।

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