konch1कोंच-उरई। परम योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्योत्सव श्रीकृष्ण जन्माष्टमी बीती रात नगर व क्षेत्र में धूमधाम से मनाया गया। सनातनी घरों के अलावा मंदिरों में घंटे घडियालों की धुनों और ब्राह्मणों द्वारा उच्चारित वेदमंत्रों के बीच देवकीनंदन का प्राकट्य हुआ। मंदिरों में भी मध्य रात्रि कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया गया, सैकड़ों लोगों ने इस अद्भुत दृश्य का रसास्वादन किया। श्रीकृष्ण अवतरण के बाद प्रसाद वितरित किया गया। श्रीकृष्णावतरण की इस पुण्य वेला में मंदिरों को काफी आकर्षक ढंग से सजाया गया था।
प्रमुख हिंदू पर्व श्रीकृष्ण जन्माष्टमी यहां नगर व क्षेत्र में पूरी श्रद्घा और विश्वास के साथ मनाया गया। दरबाजे दरबाजे बंदनवार सजाये गये थे। मंदिरों में मध्य रात्रि जन्माष्टमी के उत्सव हुये। गल्ला व्यापारियों की नगर की सबसे बड़ी धार्मिक संस्था श्रीधर्मादा रक्षिणी सभा द्वारा संचालित कल्याणराय मंदिर में जन्माष्टमी पर्व काफी धूमधाम से मनाया गया। रात्रि 11 बजे से कृष्णावतरण के लिये अनुष्ठान प्रारम्भ हो गये थे, विद्वान ब्राह्मण पं. पिंटू मिश्रा द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कन्हैया के श्रीविग्रह को पंचामृत स्नान कराया, ठीक मध्य रात्रि घंटे, घडियालों और शंख ध्वनि के बीच योगेश्वर श्रीकृष्ण का प्राकट्योत्सव सम्पन्न हुआ और सैकड़ों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने आरती गाई। तदोपरांत प्रसाद वितरित किया गया। इस दौरान धर्मादा अध्यक्ष केशव बबेले, मंत्री राकेश अग्रवाल, रमेश तिवारी, जय मुखिया, चंद्रशेखर लोहिया, राजकुमार अग्रवाल, राममोहन तीतविलासी, प्रेमनारायण राठौर, हरीशंकर लोहिया भदारी, पवन चैधरी सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। चंदकुआ पावर हाउस के निकट स्थित द्वारिकाधीश मंदिर में भी आज धूमधाम से वासुदेव श्रीकृष्ण का प्राकट्य सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर नाथूराम चैधरी, सुखनंदन दरोगाजी, ओमशंकर अग्रवाल एडवोकेट, बल्ली अग्रवाल, पप्पू चैधरी, नीलू अग्रवाल, जेके अग्रवाल सहित तमाम लोग व्यवस्थाओं में लगे थे, बाद में प्रसाद वितरित किया गया। प्राचीन रामलला मंदिर में महंत रघुनाथदास के सानिध्य में पुजारी गोविंददास ने कृष्ण जन्म की औपचारिकतायें पूरी की। स्वर्णकार समाज के मुरली मनोहर मंदिर में भी कृष्ण प्राकट्योत्सव श्रद्घाभाव से मना, अध्यक्ष चतुर्भुज चंदेरिया, प्रह्लाद सोनी, नरोत्तम सोनी सहित तमाम लोग व्यवस्थाओं में सन्नद्घ दिखे। नृसिंह मंदिर, चतुर्भुज मंदिर (बड़ा मंदिर) महंतनगर में श्रद्धा और उत्साह के साथ नंदनंदन कृष्ण का अवतरण मनाया गया। मिले समाचारों के अनुसार तिलकनगर तिराहे पर स्थित राधाबल्लभ मंदिर में एक दिन पूर्व रविवार को ही कृष्ण जन्माष्टमी मना ली गई थी।
इंसेट में-
भाजपा पर भरोसा करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं
0 बोले रामस्वरूपाचार्य, बच्चों को संस्कार देना हर माता-पिता का दायित्व
konch2जन्माष्टमी के अवसर पर कोंच आये चित्रकूट कामदगिरि पीठाधीश्वर स्वामी रामस्वरूपाचार्य जी महाराज ने यहां नृसिंह मंदिर में कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का शीघ्र निर्माण संतों का सपना है और संत आश्वस्त भी हैं कि वहां भव्य राम मंदिर का निर्माण होकर रहेगा। यह बात उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुये कही। उन्होंने यह भी कहा कि यदि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व चाह ले तो मंदिर निर्माण कोई रोक नहीं सकता है।
इस सवाल पर कि एक नहीं बल्कि अनेकों बार राम मंदिर को मुद्दा बना कर सत्ता तक पहुंचने वाली भाजपा ने हमेशा ही इस मुद्दे से पल्ला झाड़ा है, ऐसे में भाजपा पर संत कितना भरोसा कर सकते हैं। स्वामी जी ने बहुत ही सहज भाव से इसका उत्तर देते हुये कहा कि संतों और हिंदू समुदाय के पास भाजपा पर भरोसा करने के अलावा और कोई विकल्प भी नहीं है। केन्द्र की सत्ता में पूर्ण बहुमत के साथ भाजपा काबिज है और अगर भाजपा चाह ले तो मंदिर निर्माण कोई रोक नहीं सकता है। इस अवसर पर उन्होंने राम और कृष्ण के अवतरण का हेतु बताते हुये कहा कि राक्षसों या असामाजिक प्रवृत्तियों को समाप्त करने के लिये तो भगवान के अन्य अवतार ही पर्याप्त हैं लेकिन राम और कृष्ण का अवतार धारण करना विशेष हेतु के लिये है। उन्होंने राक्षसों और दानवों का नहीं अपितु राक्षसत्व और दानवत्व का नाश कर मानवता और धर्म की स्थापना की है।
उन्होंने कहा कि शास्त्रोक्त मतानुसार जीवन में संस्कृति का समावेश होना ही चाहिये। माता पिता को चाहिये कि वे अपने बच्चों को रोजगार व्यापार भले ही न दे पायें लेकिन संस्कार अवश्य दें क्योंकि संस्कारों से ही व्यक्ति महान बनता है और महानता की पराकाष्ठा पर जब इंसान पहुंच जाता है तो भगवान कहलाता है। भगवान राम और कृष्ण का अवतार समाज को संस्कार देने के लिये ही हुआ है। कुछ लोगों का मत हो सकता है कि भगवान राम और कृष्ण ने राक्षसों और दानवों के वध के लिये अवतार धारण किया लेकिन संतों का मत इससे भिन्न है, उनके मूल मतानुसार दानवों या राक्षसों को समाप्त करने के लिये भगवान के परशुराम या उन्हीं के जैसे अवतार पर्याप्त हैं जो राक्षसों को मार सकते हैं लेकिन राक्षसत्व समाप्त करने के लिये राम और कृष्ण को ही आना पड़ता है और उन्होंने अपना काम करके मानवता और धर्म की स्थापना की।

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