cropped-27c0e33e-70ae-40cd-b9cb-6e01381eb0ce11.pngउरई। जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव को लेकर अगर सपा में भूचाल की स्थिति है तो भाजपाई भी सुकून में नही हैं। उन्होंने इस पद पर अर्चना गौतम का पर्चा दाखिल कराकर अपने लिए ऐसी स्थिति बना ली है जिसके चलते उनसे न निगलते बन रहा है और न उगलते। अगर उन्होंने सपा के क्षत्रपों से किये गये अनुबंध को निभाया और अर्चना गौतम को चार से एक भी कम वोट मिला तो सपा जिलाध्यक्ष का यह आरोप सच साबित हो जायेगा कि भाजपा के सदस्य अपना वोट बेंच चुके हैं। इसके चलते भाजपाई काफी पशोपेश में हैं।
इंद्रजीत सिंह यादव ने जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए नामांकन के बाद बुलाई गई पत्रकार वार्ता में भाजपा को निशाने पर रखा था। उन्होंने आरोप लगाया था कि भाजपा के प्रदेश स्तरीय पदाधिकारी अपने सजातीय उम्मीदवार को जिताने के लिए सुमन निरंजन खेमे से लंबी रकम ले चुके हैं। इस रकम में हिस्से का प्रलोभन मिल जाने के कारण भाजपाई सदस्यों ने पार्टी उम्मीदवार की बजाय दूसरे उम्मीदवार के हाथों में खेलना शुरू कर दिया।
उधर भाजपा की ओर से अर्चना गौतम की प्रत्याशिता की घोषणा का जिम्मा खुद सांसद भानुप्रताप वर्मा ने संभाला था। इसलिए भाजपा के पास अर्चना गौतम की उम्मीदवारी वापस कराने का कोई आॅप्शन नही बचा। आगे भी भाजपा लगातार उलझती चली जा रही है। पार्टी के प्रदेश पदाधिकारी और सपा के क्षत्रप के बीच पार्टी लाइन के ऊपर के संबंध सर्वविदित हैं। जिसकी वजह से सपा के क्षत्रप की प्रतिष्ठा जहां दांव पर लगी हो वहां पर भाजपा के प्रदेश पदाधिकारी के लिए पार्टी को परे कर देना लाजमी माना जाता है। लेकिन अब हालत यह है कि अगर सुमन निरंजन के पक्ष में धु्रवीकरण में भाजपा के सदस्य शामिल होते है तो जनमानस में उन्हें बिकाऊ मान लिये जाने का खतरा है। भाजपा के लिए स्थिति बेहद पेचींदा हो गई है। 29 अगस्त को इन दबावों के बीच भाजपा की चुनावी रणनीति का ऊंट किस करवट बैठेगा यह देखना दिलचस्प होगा।

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