उरई। जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में नाम वापसी का समय गुजर गया। इस दौरान एक भी पर्चा वापस नही हो पाया जबकि अटकलों का बाजार 3 बजे की डेड लाइन तक गर्म रहा। इस एंटीक्लाइमेक्स के बाद नई अटकलों और अफवाहों ने नये सस्पेंस और नये क्लाइमेक्स का तानाबान बुन डाला। इसमें यह भी शामिल है कि समूचे बुंदेलखंड के लिए प्रभावी गरौठा के विधायक दीप नारायण सिंह यादव और सपा के सर्वमान्य बुजुर्ग जिलाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह यादव का असर खत्म हो गया है या उनके निरुपाय होने के पीछे कोई रहस्य है।
आसना खातून का चुनाव बबीना के रणभूमि में तब्दील हो जाने के समय ही विवादित हो गया था, जब अपने को असली सपाई बता रहे उनके प्रतिद्वंदियों ने खुलेआम जय श्रीराम के नारे लगाते हुए हिंदुओं की एकता का नारा बुलंद किया था। मतदान के समय हुए फसाद को लेकर मुकदमों में आरोपित किये गये लोग भी सपा से सगेपन का हवाला देते हुए लखनऊ तक पहुंचे थे और वहां उनकी बात सुनी भी गई थी। इसके बाद उनके खिलाफ गिरफ्तारी व अन्य कार्रवाई रोक दी गई थी। इसे लेकर चर्चा तो यह भी थी कि समाजवादी पार्टी अब आसना खातून को उम्मीदवार नही बनायेगी। लेकिन आसना के नाम पर ही जब मुहर लगाई गई तो एक चर्चा यह भी फैली कि ऐसा नगर विकास मंत्री आजम खां के वीटो की वजह से हुआ है। भले ही यह कयास सही न हो लेकिन अध्यक्ष चुनाव को लेकर अब जो स्थितियां बन गई हैं उनमें यह अफवाह सपा के लिए घातक दंश का काम कर रही है।
लोगों को यह विश्वास था कि सुरेंद्र मौखरी का समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से सीधा इतना जुड़ाव है कि जब ऊपर से हस्तक्षेप होगा तो उनके सामने पसीजने के अलावा कोई चारा नही रह जायेगा लेकिन ऐसा नही हुआ। लोग यह मानने को तैयार नही है कि सुरेंद्र मौखरी का उम्मीदवारी पर अडिग रहना सपा नेतृत्व से उनके पूरी तरह मोहभंग और निर्णायक बगावत का नतीजा है। बल्कि जनचर्चा यह हो रही है कि सपा नेतृत्व को सुरेंद्र मौखरी की वफादारी पर अभी तक बदस्तूर भरोसा बना हुआ है लेकिन हाईकमान ने कुछ कारणों से सुरेंद्र पर बहुत ज्यादा दबाव बनाने की जरूरत महसूस नही की। स्वयं सुरेंद्र मौखरी की निजी बातचीत से भी इस अनुमान को बल मिलता नजर आ रहा है।
29 अगस्त को जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव का परिणाम क्या होगा यह अब गहरे सस्पेंस का विषय बन चुका है। लेकिन सपा के लिए समूचे बुदेलखंड में दूरगामी तौर पर यह चुनाव गले की हड्डी साबित हो सकता है। जिस तरह की धारणाओं का कुहासा इस चुनाव के संदर्भ में सपा नेतृत्व के इर्दगिर्द व्याप्त हो चुका है उसके चलते अगर आसना खातून को कामयाबी न मिली तो न केवल जालौन जिले में बल्कि बुंदेलखंड भर में मुसलमानों की उसके प्रति क्या प्रतिक्रिया हो सकती है इस बारे में लग रही अटकलों से कोई सबसे ज्यादा खुश है तो वह बहुजन समाज पार्टी है।
उधर सुबह के 11 बजते ही जिला मजिस्ट्रेट कोर्ट में एडीएम आनंद कुमार ने आसन ग्रहण कर लिया था जबकि डीएम संदीप कौर कलैक्ट्रेट चैम्बर में बैठकर हालात का जायजा ले रहीं थी। जैसे-जैसे घड़ी की सुईयां आगे बढ़ती गई वैसे-वैसे अधिकारियों से लेकर जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय परिसर में लगे पत्रकारों के भारी जमावड़े में बेचैनी बढ़ती गई। 1 बजा, फिर 2 बजे और इसके बाद मिनटों के हिसाब से इंतजार शुरू हुआ कि पर्चा वापसी के लिए कौन आता है। एकबारगी तो यह तक चर्चा फैली कि भाजपा उम्मीदवार पार्टी के बड़े नेताओं की सुमन निरंजन के साथ दुरभि संधि को देखते हुए अकेली पर्चा वापस लेने के लिए आने वाली हैं। लेकिन यह अटकल भी खाली चली गई। पौने तीन बजे अचानक अफवाहों का बाजार गर्म हुआ कि आसना खातून अपनी पार्टी की उठापटक से खिन्न होकर पर्चा वापस लेने आ रही हैं। इन अफवाहों को बल इसलिए मिला कि कुछ देर पहले अनीस की गाड़ी कलेक्ट्रेट का एक चक्कर लगाकर लौट गई थी। इस बीच बोर होकर अपर जिला मजिस्ट्रेट आनंद कुमार अपने आासन से उठकर नीचे पत्रकारों के बीच आ गये और उनसे बतियाते रहे। सुमन निरंजन की ओर से हाईकोर्ट का एक आदेश जिला मजिस्ट्रेट का थमाया जा चुका था जिसमें उन्हें निर्देश थे कि चुनाव में किसी तरह की गड़बड़ी न होने देना सुनिश्चित करें। इसके मददेनजर सुमन निरंजन की पर्चा वापसी की संभावना पर चर्चा शुरुआत मे ही बंद हो गई थी। बहरहाल जैसे ही तीन बजे सारी अटकलों और ऊहापोह को विराम लग गया। घड़ी को ओर देखते हुए एडीएम आनंद कुमार डीएम कोर्ट से उठे और पत्रकारों से यह कहते हुए अपने कार्यालय चले गये कि सारे पर्चे बरकरार रहे हैं। उधर पत्रकार भी लगातार उत्सुक लोगों की आ रही इन काॅल का जबाव देने में बिजी हो गये कि कोई पर्चा वापस हुआ है या नही।






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