उरई। जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में रोमांच के नये-नये कोण सामने आ रहे हैं। जिला निर्वाचन अधिकारी संदीप कौर द्वारा कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में बुलाई गई बैठक में दस से भी कम सदस्य पहुंचे। जाहिर है कि ज्यादातर सदस्य या तो भूमिगत है या किसी प्रत्याशी विशेष के लिए बुक हो जाने से उनके खर्चे पर सैर करने निकल गये हैं। हालांकि रविवार को सभी सदस्यों को प्रकट होने के लिए बाध्य होना पड़ेगा क्योंकि उनके परिचय पत्र बनने हैं जो वोट डालने के लिए जाते समय दिखाना अनिवार्य होगा।
जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा सभी जिला पंचायत सदस्यों को शनिवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में मत प्रक्रिया से अवगत कराने के लिए बुलाया गया था। इस पर सभी की निगाहें टिकी हुईं थी। खास तौर से मीडियाकर्मी यह देखने के लिए उत्सुक थे कि कौन सा सदस्य किस प्रत्याशी के साथ घुलमिल रहा है लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी। पच्चीस में से दस सदस्य भी बैठक में नही पहुंचे। बताया गया है कि फिलहाल नदारत रहे सदस्य किसी न किसी प्रत्याशी के खर्चे पर या तो तीर्थाटन के लिए गये हैं या जियारत के लिए। भाजपा की तो प्रत्याशी तक गायब थी। यहां तक कि उनके पति भी नही आये थे जबकि अन्य महिला सदस्यों का प्रतिनिधित्व उनके पति कर रहे थे।
जिला निर्वाचन अधिकारी संदीप कौर ने बैठक में सदस्यों को बताया कि रविवार को निर्वाचन प्रमाण पत्र लेकर प्रत्याशी को डीएम न्यायालय में उपस्थित होना पड़ेगा। अगर किसी सदस्य का प्रमाण पत्र गुम है तो तत्काल उसके लिए डुप्लीकेट निर्वाचन प्रमाण पत्र जारी करने की व्यवस्था रहेगी। निर्वाचन प्रमाण पत्र के आधार पर सदस्य को परिचय पत्र दिया जायेगा जो वोट के लिए मतदान कक्ष में इंट्री के पूर्व दिखाना अनिवार्य होगा।
बैठक में आसना खातून तो मौजूद थी लेकिन सुमन निरंजन के स्थान पर उनके पति देवेंद्र निरंजन और संध्या मौखरी के स्थान पर उनके पति सुरेंद्र मौखरी आये थे। नम्रता दीक्षित भी बैठक में नहीं आई उनका प्रतिनिधित्व उनके पति सुदामा दीक्षित ने किया। भाजपा के सदस्यों में बाबा बालक दास और पुष्पेंद्र सेंगर ने ही भाग लिया। बसपा के सदस्यों में अलताफ हुसैन और ललिता सिंह के पति रुद्र प्रताप सिंह मौजूद रहे। सपा के सदस्यों में प्रत्याशी के अलावा दीपराज गुर्जर, धर्मेंद्र गुडडू जौरा खेरा शामिल हुए। बैठक के बाद भाजपा सांसद भानु प्रताप वर्मा और पूर्व विधायक संतराम सिंह सेंगर ने डीएम संदीप कौर से भेंट करके चुनाव से जुड़ी आशंकायें उनके सामने जाहिर की। डीएम ने उन्हें पूरी निष्पक्षता का भरोसा दिलाया। भाजपा नेताओं के द्वारा इस संजीदगी के प्रदर्शन से लगता है कि इंद्रजीत सिंह यादव और पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी द्वारा उनके ईमान पर जिस तरह से उंगलियां उठाई गई हैं उससे वे पर्याप्त विचलित हो गये हैं। लेकिन अर्चना गौतम का आज की बैठक में कोई प्रतिनिधित्व न होना नई अटकलों को जन्म दे गया है। इस बात की जोरों से सुगबुगाहट है कि एक प्रत्याशी के पति देर रात में भाजपा के मठाधीशों के घर बारी-बारी से पहुंचे। क्या इस नाइट मिशन के चलते भाजपा के नेताओं का कोई हृदय परिवर्तन हुआ है और क्या भाजपा के नेताओं ने अनुरागी और इंद्रजीत सिंह यादव के आरोपों की परवाह न कर अपने प्रत्याशी से किसी और प्रत्याशी को वाकओवर दिलाने का फैसला कर लिया है। इस बारे में अटकलों की वास्तविकता 29 अगस्त को ही जाहिर होगी।






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