0 जागरूक होकर अपनी जिम्मेदारी निभाये ग्रामीण-तहसीलदार
konch4कोंच-उरई। ग्राम पनयारा के पूर्व माध्यमिक विद्यालय में सिविल जज जूनियर डिविजन वीके कटियार की अध्यक्षता व तहसीलदार भूपाल सिंह की मौजूदगी में विधिक साक्षरता शिविर सम्पन्न हुआ जिसमें जेएम वीके कटियार ने ग्रामीणों को कानून के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कानून के तीनों आयामों के बारे में कहा कि समाज के व्यवहार का परावर्तन ही कानून है, समाज में जो कुछ होता है उसी के अनुसार कानून अपना काम करता है इसलिये आवश्यकता है कि समाज में सब कुछ अच्छा हो, समाज अच्छा बने, आपसी मतभेद मिल बैठकर निपटा लिये जायें। उन्होंने जोर देकर कहा कि कटुता कितनी भी बढ जाये लेकिन बात करने की गुंजाइश रखनी चाहिये, जैसे पानी से भरे गिलास में चीनी को समाहित किया जा सकता है ठीक उसी प्रकार हम कितने ही गुस्से में क्यो न हों किंतु यदि कोई प्रेम से पास आता है तो उसे अपना लेना चाहिये इससे विकट से विकट समस्या का निदान हो जायेगा। उन्होंने फौजदारी, दीवानी, राजस्व आदि के कानून की विस्तृत जानकारी दी।
विधिक प्राधिकरण के सचिव तहसीलदार भूपाल सिंह ने शिक्षाधिकार गारंटी, सूचनाधिकार अधिनियम, खाद्य सुरक्षा अधिनियम, कृषक बीमा योजना, आम आदमी बीमा योजना, विभिन्न प्रमाण पत्रों के बनने में मिलने बाली सुविधाओं के बारे में विस्तार से बताया, साथ ही कहा कि लोगों को जागरूक बनकर अपने अधिकारों व कर्तव्यों को जानने तथा उन्हें निभाने की जरूरत है तभी गांव का विकास संभव है। वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश उदैनिया ने व्हीकल एक्ट की विस्तृत जानकारी दी तो उपजा नगर अध्यक्ष अंजनी श्रीवास्तव ने आपसी भाईचारा बनाये रखने पर बल दिया। पूर्व प्रधान पडरी रामप्रकाश निरंजन ने गांव में पनपने बाली छोटी छोटी समस्याओं को आपस में मिल बैठ कर निपटाने की सलाह ग्रामीणों को दी। वरिष्ठ अधिवक्ता ओमप्रकाश कौशिक, सागर चैकी प्रभारी रवीन्द्र त्रिपाठी ने भी संबोधित किया। संचालन बरिष्ठ अधिवक्ता विजय नारायण निगम ने किया। इस दौरान एसएसआई अजय कुमार सिंह, सुरेन्द्र सिंह निरंजन अध्यापक, युवा समाजसेवी सर्वेश सिंह पटेल पनयारा, पूर्व प्रधान गोविंदसिंह निरंजन, बलराम पटेल, राशन विक्रेता लक्ष्मन पटेल कटकरी आदि उपस्थित रहे। ग्राम प्रधान अरविंद सिरवैया ने आभार जताया।
इंसेट में-
अन्ना जानवर छोडने वाले भी फंस सकते हैं कानून के दायरे में
सावधान, मवेशी मालिक आ सकते है लोक सम्पत्ति क्षति निवारण संबंधी अधिनियम के दायरे में, फंससकते हैं धारा 2ध्3 में। विधिक साक्षरता शिविर में ग्रामीणों के संज्ञान में यह बात भी डाल दी गई है कि स्थानीय प्रशासन अन्ना प्रथा से किसानों को निजात दिलाने के लिये सख्त कदम उठाने जा रहा है जिसमें आवारा घूमने बाले मवेशियों की पहचान सरकारी कर्मचारी द्वारा करायी जायेगी और इसके बाद संबंधित व्यक्ति को एक बार चेतावनी दी जायेगी कि वह अपने मवेशियों को छुट्टा न छोड़ें, यदि मालिक ने आदेश की अवहेलना की तो उसके खिलाफ कोतवाली या संबंधित थाने में रिपोर्ट सरकारी कर्मचारी के द्वारा एफआईआर दर्ज करा कर विधिक कार्यवाही अमल में लाई जायेगी।

Leave a comment