29orai04उरई। जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में 15-10 के बड़े अंतर से चुनाव जीतने वाली निर्दलीय उम्मीदवार सुमन निरंजन ने अपनी मजबूत रणनीति के साथ चुनाव लड़ा और कामयाबी भी मिली। उनके द्वारा सत्तापक्ष के किसी रिस्क का इस कदर ख्याल रखा गया कि दोपहर 12 बजे से पहले ही उन्होंने अपने संभावित समर्थित सदस्यों के वोट इस्तेमाल करवा लिये। इसके बाद तो सिर्फ परिसर में अन्य आने वालों मतों पर सिर्फ ऊपरी नजरें ही रखी गईं।
सुमन निरंजन ने बड़ी मजबूती और दूर दृष्टि के साथ यह चुनाव लड़ा। आखिरी तक वह खुद को निर्दलीय प्रत्याशी की हैसियत से ही मैदान में डटी रहीं और सौदेबाजी के लिए व्याकुल हो रहे बसपा और भाजपा के मतो पर आर्थिक जातीय और क्षेत्रिता के आधार पर उपायों का इस्तेमाल किया जाता रहा। सपा सदस्यों की नाराजगी उनके लिए बोनस के रूप में उभरी। उनकी इस रणनीति को सपा के एक क्षत्रप के द्वारा भी मजबूती प्रदान की गई थी जो अंत तक सुखद परिणाम के रूप में कामयाब हुई। एक दिन पहले तक इस चुनाव के परिणाम पर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। सत्ता होने के बावजूद सपा उम्मीदवार आसना खातून की पराजय इतनी तगड़ी होगी इसकी उम्मीद राजनीतिक प्रेक्षकों को भी नही थी। क्षत्रप की ओर से संभवतः इस बात की ओर इशारा जरूर रहा होगा कि पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी अपनी प्रतिष्ठा को बचाने के लिए किसी प्रकार का दांव चल सकते हैं। इसी वजह से सुमन निरंजन अर्चना गौतम को साथ लेकर सबसे पहले वोट डालने पहुंचीं। इसके बाद पुष्पेंद्र सेंगर, रविंद्र हरौली, ललिता भदौरिया, रामकुमार गुप्ता, बुद्धे कोरी सहित 12 वोट डाले गये। जिनके बारे में यह कयास पहले ही लग चुका था कि अधिकांश वोट उनके ही खाते में गये हैं। 12 बजे के पहले ही सुमन पक्ष की ओर से रणनीति को अंजाम तक पहुंचा दिया गया। भाजपा तथा बसपा संबंधित पुरुष मतदाता इसके बाद चुनावी गतिविधियों का मजा लेकर उम्मीद के अनुसार परिणाम को लेकर आनंदित होते रहे। सपा के युवा नेता दीपराज गुर्जर भी स्थितियों को भांपने के लिए सभी में घुलते-मिलते रहे। उनकी बातों से ऐसा कतई एहसास नही होने पाया कि आसना खातून चुनाव में कमजोर पड़ रही हैं। इस बार के चुनाव में तनाव जरूर किसी किस्म का नही दिखा।
सुरक्षा को लेकर भारी किलेबंदी जरूर थी किंतु ऐसी आशंका कभी नही उभरी कि सत्ता का बेजा इस्तेमाल करने की कोई रणनीति इस्तेमाल में लाई जा सकती है। ऐसी स्थिति में सुमन की स्थिति मजबूत होती गई। 1 बजे तक 19 वोट डाले जा चुके थे। 20 वां वोट राधा अनुरागी डालने पहुंची उनके साथ ही नम्रता तिवारी दीक्षित भी वोट डालने पहुंचीं। थोड़ी देर बाद ही शिशुपाल यादव भी चेहरे पर हल्की मुस्कराहट के साथ कलेक्ट्रेट परिसर में दाखिल हुए। अपनी मुस्कराहट के बल पर ही वह तमाम कयासों को छिपाने में सफल बने रहे। इसके बाद इच्छाराजे के साथ महंत कृष्णपाल ने वोट डाला। वोट डालने वालों की यह आखिरी जोड़ी थी। तीन बचे के बाद जब परिणाम आया उससे आसना खातून समर्थकों सहित पार्टी के उन नेताओं को मायूस कर दिया जो अपनी जीत को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त लग रहे थे।

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