29orai06 29orai07 29orai08उरई। वीणा स्मृति समागम के द्वारा याद किया गया स्वर-कोकिला डॉ. वीणा को संगीत, कला, संस्कृति, साहित्य, शिक्षा क्षेत्र में एकसमान रूप से अपना अधिकार रखने वाली डॉ० वीणा श्रीवास्तव ‘वीणा’ जी को उनकी प्रथम पुण्यतिथि की पूर्व संध्या पर ‘वीणा स्मृति समागम’ का आयोजन कर याद किया गया।
स्मरण रहे कि दयानंद वैदिक कॉलेज, उरई के संगीत विभाग की अध्यक्ष के रूप में कार्यरत रहते हुए डॉ० वीणा जी का गत वर्ष एक कार दुर्घटना में निधन हो गया था। उन्हें बुन्देलखण्ड की स्वर-कोकिला के रूप में भी ख्याति प्राप्त थी. ‘वीणा स्मृति समागम’ का आरम्भ वीणा जी के चर्चित एवं सुप्रसिद्ध गीत ‘आजादी में कैसा बंधन, दम घुटता है’ के द्वारा हुआ। गत वर्ष दतिया में हुए मधुकर सम्मान पश्चात् मंच पर गाये गए इस गीत को वीणा जी की ही आवाज सुनकर समस्त उपस्थितजन वीणा जी की याद में खो गए। श्रद्धांजलि के चरण में ‘सुर-सरगम में तुम बसती हो’ के द्वारा विभिन्न कलाकारों ने भजन, गीत, गजल के माध्यम से वीणा जी को सांगीतिक श्रद्धांजलि अर्पित की। भोपाल से आईं वीणा जी की छोटी बहिनों डॉ० नीना श्रीवास्तव और रीमा सक्सेना ने वंदना के द्वारा उनको याद किया। वीणा जी की पुत्री श्रुति ने उनकी लोकप्रिय गजल ‘आज जाने की जिद न करो’ के गायन के द्वारा वातावरण को वीणा जी से तादात्म्य स्थापित करने को विवश किया. वीणा जी की शिष्या रही गरिमा पाठक ने वीणा जी को उन्हीं के प्रसिद्द ‘दमादम मस्त कलंदर’ गाकर याद किया। सञ्चालन कर रहे प्रसिद्द गायक मिर्जा सबीर बेग ने ‘चिट्ठी न कोई सन्देश, जाने वो कौन सा देश’ गाकर लोगों की आँखों को नम कर दिया। जनपद की एक और प्रतिभा राजेश निरंजन ने भजन के द्वारा वीणा जी को याद किया तो भजन गायकी के लिए प्रसिद्द भाइयों दीपू-शीलू की जोड़ी ने ‘तेरा राम जी करेंगे बेड़ा पार’ के द्वारा अपने श्रद्धासुमन अर्पित किये। इसके अलावा शालिनी मिर्जा, विश्वप्रभा त्रिपाठी, समीक्षा नायक, के. के. निगम, गुलशन, संतोष राठौर आदि ने भी सांगीतिक श्रद्धांजलि अर्पित की।
इसके पश्चात् वीणा जी की रचनाओं के संकलन की प्रकाशित पुस्तक ‘वीणा श्रुति’ का विमोचन अतिथियों प्रसिद्द गीतकार और कवि रामेन्द्र त्रिपाठी, युगकवि रामस्वरूप खरे, योगी जी तथा उनके परिजनों द्वारा किया गया. इस पुस्तक में वीणा जी के गीत, गजल, कविताओं को संकलित किया गया है। जिसका संपादन उनके सहायक प्राध्यापक पुत्र सत्यांशु श्रीवास्तव एवं सृजन समीक्षा के संपादक सत्यवान द्वारा संयुक्त रूप से किया गया. इस दौरान वीणा जी के पति और दयानंद वैदिक महाविद्यालय के मनोविज्ञान के प्राध्यापक डॉ० अरुण कुमार श्रीवास्तव द्वारा ‘वीणा फाउंडेशन’ आरम्भ किये जाने की घोषणा की गई। उनके द्वारा बताया गया कि इस फाउंडेशन के द्वारा गरीब लड़कियों की शिक्षा की व्यवस्था की जाएगी। संगीत विषय से सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी को विश्वविद्यालय स्तर पर पदक प्रदान किया जायेगा। इसके अलावा संगीत, कला, साहित्य, संस्कृति के क्षेत्र में प्रतिभा प्रोत्साहन हेतु बुन्देलखण्ड स्तर के साथ-साथ प्रदेश स्तर पर भी कार्य किये जायेंगे।
‘हैं शब्द समर्पित वीणा को’ के तीसरे चरण में कवि सम्मलेन एवं मुशायरा के माध्यम से कवियों, साहित्यकारों ने वीणा जी को याद किया। श्रद्धांजलि रूप में इस कवि सम्मलेन एवं मुशायरे की अध्यक्ष के रूप में सर्वसम्मति से डॉ० वीणा श्रीवास्तव ‘वीणा’ जी के ही नाम पर सहमति बनी। आगरा से पधारे प्रसिद्द कवि रामेन्द्र त्रिपाठी ने वीणा जी के साथ अपनी मंचीय प्रस्तुतियों को याद करते हुए बताया कि साहित्य ने अपना कोहिनूर खो दिया है। उन्होंने ‘ऐसा कोई दिन याद नहीं, जिस दिन तुम्हें याद न किया’ के द्वारा वीणा जी को काव्यांजलि अर्पित की। इसके साथ-साथ उन्होंने ‘प्रेम है कच्चा सूत, टूटे और फिर जुड़ जाये’ के द्वारा प्रेम की नई परिभाषा प्रस्तुत करते हुए वीणा जी को याद किया। जालौन से आये वरिष्ठ कवि एवं रंगकर्मी पूरन चन्द्र मिश्र ‘पूरन’ ने ‘समय रहते समय से सीख लो रहना न रहना, समय कहता है मैं रहता हूँ मगर रहता नहीं’ के द्वारा अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। जयपुर से पधारे प्रसिद्द कवि सत्य चन्दन ने वीणा जी को याद करते हुए कहा कि उनके निधन के एक रात पहले ही एक काव्य रचना पर वीणा जी से उनकी चर्चा हो रही थी। ‘तुम्हारे साथ जो गुजरे वो सब लम्हे उठाकर हम, सफर करते हैं बाकी जिन्दगी का मुस्कुराकर हम’ के द्वारा उन्होंने अपने श्रद्धासुमन अर्पित किये। सञ्चालन कर रहे अर्जुन सिंह ‘चाँद’ ने ‘झंकृत वीणा जब रही, बनते फिर शब्द चित्र’ के द्वारा वीणा जी को याद किया। जालौन के सुप्रसिद्ध गजलकार नासिर अली ‘नदीम’ ने वीणा जी की प्रसिद्द गजल ‘काम ये कैसा कर गया पानी’ की कहानी को बताते हुए अपनी काव्यांजलि अर्पित की। लखनऊ से पधारे भावुक जी ने अपनी पंक्तियों ‘याद उनकी नहीं, उनका एहसास साथ है’ के द्वारा वीणा जी को याद किया. झाँसी से आये सत्यप्रकाश ताम्रकार ने ‘गई नहीं हैं वे दूर कहीं, बस गजल सुनाकर आती होंगी’ के द्वारा वीणा जी का स्मरण किया। युवा गीतकार अनुज भदौरिया ने ‘तितली के पंखों से उडती और मचलती वीणा’ के द्वारा अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित की। ‘हैं शब्द समर्पित वीणा को’ के द्वारा झाँसी से आये हलीम राणा, नईम बोबी, कालपी से निधि सिन्हा ‘निदा’, जालौन से रवीन्द्र शर्मा, योगी जी सहित यज्ञदत्त त्रिपाठी, रामस्वरूप खरे, प्रेमनारायण दीक्षित, सुरेश त्रिपाठी, डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर, गिरधर खरे, विनोद गौतम आदि ने भी काव्यमयी श्रद्धांजलि अर्पित की।
‘वीणा स्मृति समागम’ में वीणा जी के परिजनों सहित डॉ० आदित्य कुमार, सत चित आनंद, डॉ० के.सी. गुप्ता, डॉ० राजेन्द्र पुरवार, डॉ० जयश्री पुरवार, योगेश्वरी प्रसाद ‘अलि’, के. पी. सिंह, डॉ० परमात्मा शरण गुप्ता, डॉ० रामेन्द्र गुप्ता, डॉ० दुर्गेश कुमार सिंह, डॉ० विपेंद्र सिंह, सुभाष चंद्रा, सुरेन्द्र सिंह कुशवाह, राज पप्पन, डॉ० अलका नायक, सुधा लोधी, इंदु श्रीवास्तव, सुमन आनंद, निशा सिंह, शरत श्रीवास्तव, अश्वनी मिश्र, गुड्डू जी, युद्धवीर कंथरिया, सत्यपाल शर्मा, वीरेंद्र तिवारी, नाथूराम निगम, डॉ० अतुल बुधौलिया सहित सैकड़ों गणमान्य नागरिकों ने अपने श्रद्धासुमन अर्पित किये।

Leave a comment