डाॅ. राकेश द्विवेदी
उरई। जिला पंचायत अध्यक्ष का परिणाम सुनकर हतप्रभ हुए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अब गुस्से में आ गये थे। तभी तो उन्होंने झांसी लौट रहे चुनाव प्रभारी दीपनारायण यादव को अविलंब लखनऊ तलब कर उनसे चुनाव की रिपोर्ट मांगी थी। सारा वाकया जानने के बाद उन्होंने कार्रवाई का मन बना लिया था। इसके बाद उन्होंने आज सुबह जिलाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह यादव को भी सारी सूचनाओं के साथ तलब किया और भितरघात का आरोप सिद्ध हो जाने पर पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष शिशुपाल यादव, पूर्व जिला पंचायत सदस्य सुरेंद्र यादव मौखरी, पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व जिलाध्यक्ष विष्णुपाल सिंह नन्हू राजा तथा पूर्व जिला उपाध्यक्ष सुदामा दीक्षित को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। इस कार्रवाई से जिले के कार्यकर्ताओं मे कड़ा संदेश गया है।
मतदान के ठीक एक दिन पहले मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से सपा नेता सुदामा दीक्षित व सुरेंद्र यादव मौखरी मिलने पहुंचे थे। इनके अतरिक्त चुनाव प्रभारी गरौठा विधायक दीपनारायण यादव तथा जिलाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह यादव भी थे। इन नेताओं की नाराजगी की मुख्य वजह पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी की अहंकारपूर्ण राजनीति बताई गई। सुदामा और सुरेंद्र ने दुखित भाव यह कह कर रखा कि पूरी निष्ठा और समर्पण के बावजूद उनके साथ पार्टी में बेहद उपेक्षापूर्ण व्यवहार किया गया। पूर्व सांसद की राजनीतिक चालोें से जिले में स्वयं पार्टी कार्यकर्ताओं में भी असंतोष बढ़ रहा है। बताया जाता है कि इन सब बातों को सुनकर मुख्यमंत्री का भी धैर्य टूट गया था। वे पूर्व सांसद के प्रति कार्रवाई पूर्ण कदम उठाने की ओर बढ़े, तब दीपनारायण ने यह कहकर बचाव किया कि चुनाव के समय की गई कोई कार्रवाई पार्टी को ही नुकसान पहुंचायेगी। इस बात का इंद्रजीत यादव ने भी समर्थन किया।
अनुरागी के वर्चस्व में बढ़ोत्तरी होने से घबराये सुदामा और सुरेंद्र पर मुख्यमंत्री से हुई मुलाकात के बाद भी कोई परिवर्तन नही ला पाये। उनकी पीड़ा का घाव यथावत बना रहा। मुख्यमंत्री की ओर से उन्हें जो भी भरोसा दिया गया वह मरहम का रूप नही ले पाया।
निर्दलीय प्रत्याशी सुमन निरंजन को जो 15 वोट मिले हैं उनमें बसपा के पांच, भाजपा के चार और सपा की ओर से शिशुपाल यादव, नम्रता तिवारी दीक्षित, संध्या यादव मौखरी, निर्दलीय सदस्य पूनम निरंजन और इच्छाराजे के वोट मिलना बताया जाता है और एक मत स्वयं प्रत्याशी का रहा इस लिहाज से गणित 15 का बैठता है। महान दल के दोनों वोटों के साथ बसपा का एक वोट आसना खातून पाने में सफल हुई ऐसे संकेत मिले हैं। दीपराज गुर्जर, धर्मेंद्र राजपूत गुडडू भी सपा प्रत्याशी के पक्ष में खड़े रहे। वोटों का यही गणित मुख्यमंत्री के पास लेकर दीपनारायण रात में ही लखनऊ पहुंचे। बताया गया है कि परिणाम घोषित होने के बाद जब वह झांसी की ओर लौट रहे थे तभी मुख्यमंत्री आवास से फोन कर उन्हें पूरी रिपोर्ट के साथ फौरन लखनऊ आने को कहा गया। पूरे प्रकरण को मुख्यमंत्री खुद की अवमानना से जोड़ कर देखा है। पार्टी के विश्वस्त सूत्रों के अनुसार दीपनारायण इस चुनाव की बिंदुवार रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौपते हुए शिशुपाल यादव, विष्णुपाल सिंह नन्हू राजा, सुदामा दीक्षित तथा सुरेंद्र मौखरी की प्रतिबद्धता को संदेह के घेरे में ला दिया। लखनऊ में बताया गया कि शिशुपाल यादव, संध्या यादव, नम्रता तिवारी दीक्षित तथा इच्छाराजे का वोट सपा प्रत्याशी के खिलाफ गया। चुनाव प्रभारी की रिपोर्ट के बाद अखिलेश यादव उक्त सभी लोगों पर कार्रवाई का मन कल ही बना लिया था। फिर भी उन्होंने कुछ अन्य चीजों की जानकारी के लिए जिलाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह यादव को लखनऊ बुलवा लिया और सभी आरोपों पर विश्वास होने के बाद तत्काल ही उक्त चारों वरिष्ठ नेताओं को पार्टी से निष्कासित करने का फरमान जारी कर दिया गया।






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