रामपुरा-उरई। शुद्ध पेयजल की सरकारी व्यवस्था लोगों की सेहत से खिलवाड़ का जरिया बनी हुई है। इस व्यवस्था का पानी भले ही जहरीला न कहा जा सके लेकिन अपनी तासीर और असर में यह स्लो प्वाॅइजन का रोल अदा कर रहा है। अव्यवस्थाओं के कारण लोगों के घरों में नलों से जो पानी निकलता है वह इतना प्रदूषित होता है कि पीने वालों को बीमारियों की सौगात देता रहता है। कई ग्रामीण शुद्ध पानी के इस मृग मारीचिका के चलते असाध्य उदर और अन्य विकार के रोगी बन चुके हैं।
ब्लाॅक क्षेत्र के टीहर गांव में कई वर्ष पहले स्थापित जल कल इकाई से तीन गांवों की सप्लाई व्यवस्था जुड़ी हुई है। टीहर के अलावा फतेहपुरा और सोनेपुरा में भी इसी टंकी से सप्लाई होती है। रखरखाव के अभाव में टीहर की इस टंकी को बदहाल कर दिया है। टंकी में रिसाव होने लगा है और अलग-अलग गांवों के लिए बनी लाइनों के वाल्व खराब हो गये हैं। जिसके कारण पूरे फोर्स से पानी नही जा पाता साथ ही पानी के साथ गंदगी चली जाती है। यह प्रदूषित पानी सेहत के लिए गंभीर खतरा साबित हो रहा है। दर्जनों ग्रामीणों की जिंदगी इस पानी को पीने से लगातार होते गये उदर विकार के कारण नरक बन चुकी है। दूसरी ओर जनजीवन के लिए इस खतरनाक समस्या को गंभीरता से संज्ञान में लेने की चेतना अभी तक प्रशासन में नही है। इसके कारण इस समस्या के निदान के लिए कोई उपाय भी नही हो पा रहा।






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