उरई —बुढ़वा मंगल पर नगर के दोनों हनुमान मंदिरों मे श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा .दिन भर प्रमुख मार्गों पर भारी चहल पहल के कारण यातायात अव्यवस्थित रहा. हालांकि इससे भक्ति भावना से ओतप्रोत श्रद्धालु परेशानी महसूस करने की वजाय और ज्यादा जोश दिखा रहे थे.

बुढ़वा मंगल की पहचान एक समय मल्ल महोत्सव के रूप मे थी .भक्ति के साथ साथ नई पीढ़ी इस दिन अपने उस्तादों से कुश्ती के नए दांव सीखती थी.घटिया वाले महावीर के नाम से होने वाले दंगल मे ग्रामीण क्षेत्रों तक से हजारों की भीड़ उमड़ती थी .कुश्ती की ललक जगाने वाले पर्व की वजह से देशी खेल का सरक्षण होता था जिससे आम जन जीवन की सेहत का स्तर आज की तुलना मे बहुत उम्दा था. युवा पहलवानी के शौक के कारण अपने आप नशे से दूर रहते थे.छेड़छाड़ और दुष्कर्म जैसी वारदातें बिरले ही सुनी जाती थी लेकिन आज धार्मिक पर्व को भी एंजॉय करने का युग हे .
इस नाते बुढ़वा मंगल पर उल्लास तो पहले के वर्षों से बहुत ज्यादा दिखा लेकिन अंदाज आधुनिक और निराला था .बुढ़वा मंगल पर परम्परागत दर्शन ठड़ेशवरी मंदिर मे दक्षिणमुखी हनुमान प्रतिमा के किए जाते हे जिसकी वजह से यहाँ भी फोर्स का व्यापक इंतज़ाम किया गया था लेकिन मुख्य रूप से महंत सिढ़्धेश्वरमहाराज के नेत्रत्व मे स्वयम सेवकों ने सम्हाल रखी थी जबकि बाँसों वाले हनुमान मंदिर के रूप मे उभरे नए तीर्थ मे व्यवस्था का पूरा दारोमदार यातायात पुलिस के हवाले था .







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