माधौगढ़-उरई। सीएमओ द्वारा आकस्मिक निरीक्षण के दौरान सीज किये गये फर्जी अस्पताल संचालक के खिलाफ एक पखवारे से अधिक का समय बीत जाने के बावजूद एफआईआर दर्ज कराने की सुध नही ली जा रही। जबकि बिना डाॅक्टर और अधिकृत फार्मासिस्ट, एएनएम के नर्सिंग होम नुमा अस्पताल संचालित किया जाना सीरियस जुर्म की श्रेणी में आता है।
स्वास्थ्य विभाग की ढील की वजह से जिले के ग्रामीण अंचलों में झोलाछाप डाॅक्टरों की तो भरमार नजर आ ही रही है। नीम-हकीम बिना डिग्री डिप्लोमा के नर्सिंग होम तक खोलने का दुस्साहस करने लगे हैं। जिससे जनजीवन के साथ गंभीर खिलवाड़ हो रहा है।
कार्यवाहक सीएमओ डाॅ. आशाराम अपने कार्यकाल में महीना बांधकर चैन की नींद सोते थे जिससे फर्जी अस्पताल चलाने वाले बेफिक्र रहते थे। लेकिन सीएमओ के रूप में डाॅ. अशोक कुमार ने अपनी नियुक्ति के बाद ढर्रा बदलने की कोशिश की तो लोग उम्मीद लगा बैठे थे कि अब फर्जीबाड़े का यह खेल खत्म हो जायेगा।
इसी बीच सीएमओ डाॅ. अशोक कुमार को सूचना मिली कि औरैया की एक गाॅडमदर नुमा महिला पिछले चार महीने से माधौगढ़ में फर्जी अस्पताल चला रही है जिसमें नौसिखिया दाईयों द्वारा डिलेवरी किये जाने के कारण दो प्रसूताओं की मौत भी हो चुकी है लेकिन मामला जागरूकता की कमी की वजह से तूल नही पकड़ सका था पर यह सिलसिला जारी रहने पर किसी दिन तूफानी बखेड़ा खड़ा हो सकता है। इस सूचना के आधार पर एक पखवारा पहले सीएमओ ने अचानक उक्त फर्जी नीलकंठ अस्पताल पर दबिश दी। इस दौरान अस्पताल के कर्ताधर्ता तो भाग निकले। लेकिन सीएमओ ने उपजिलाधिकारी को खबर कर अस्पताल सील करा दिया।
सीएमओ ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कराने की बात भी कही थी तांकि भविष्य में कोई फर्जी अस्पताल खोलने जैसा दुस्साहस न दिखा सके। लेकिन अब खबर है कि इस मामले को ठंडे बस्ते में डाला जा रहा है। जिसके कारण एफआईआर दर्ज कराने की चर्चा तक नही हो रही। इसके लिए जो भी जिम्मेदार हो लेकिन चूंकि यह अस्पताल खुद सीएमओ ने पकड़ा था इसलिए एफआईआर न होने से उनकी सत्य निष्ठा जनमानस के बीच संदेह के घेरे में आ गई है।







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