0 कल लिये गये ब्लड सैंपुल्स की रिपोर्टें अब तक नहीं आईं
0 सीएचसी की दवायें बीमारी पर बेअसर, डाल रहीं हैं उल्टा प्रभाव
0 अभी यह भी तय नहीं कि बीमारी कौन सी है
कोंच-उरई। पिछले कई दिनों से विचित्र बीमारी से जूझ रही लौना गांव की जनता का अभी भी पुरसा हाल नहीं है। हालांकि अखबारों में खबरें साया होने और सीधे जिलाधिकारी के संज्ञान में डालने का इतना असर जरूर हुआ है कि कल और आज गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीमें पहुंचीं लेकिन उनके द्वारा दी जाने बाली दवा का फिलहाल कोई फायदा बीमारों को नहीं मिल पा रहा है, बल्कि दवाओं का असर उल्टा पड़ता दिख रहा है। ग्रामीणों की अगर मानें तो दवा लेने के बाद मरीजों के शरीर में जलन सी बढी है। बीमारों के लिये गये ब्लड सैंपुल्स की रिपोर्टें दो दिन बाद भी नहीं मिल पाना विभागीय कार्यशैली पर सवालिया निशान जडने बाला है। स्वास्थ्य विभाग अभी तक यह भी घोषणा नहीं कर सका है कि गांव किस बीमारी से ग्रसित है।
विकास खंड कोंच के तहसील मुख्यालय से महज ढाई किमी की दूरी पर अवस्थित गांव लौना पिछले कई दिनों से महामारी जैसी बीमारी की चपेट में है और कमोवेश सत्त्र से अस्सी फीसदी आबादी खाट पकड़े है। इन बीमारों में बच्च्े बूढे और जवान सभी शामिल हैं। घरों के अधिकांश सदस्यों के खटिया पकड़े होने की बजह से लोगों के सामने तमाम तरह की मुश्किलें पैदा हो रहीं हैं। खबरनबीसों ने जब गांव का दौरा कर हालातों का जायजा लिया तो स्थिति बहुत ही भयावह दिखी। अखबारों में खबरें प्रकाशित होने और व्यक्तिगत रूप से जिलाधिकारी के संज्ञान में मामला डालने का इतना असर तो हुआ है कि डॉक्टरों की टीमें गांव में पहुंचीं हैं और प्राइमरी स्कूल में कैम्प लगा कर मरीजों को देख कर दवायें भी दी जा रहीं हैं लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि इन दवाओं से फायदा होने के उलट बीमारों के शरीर में जलन और बढ गई है। पिंडारी सीएचसी से गांव पहुंची टीम में डॉ. जितेन्द्रसिंह, स्वास्थ्य पर्यवेक्षक विनोदकुमार मिश्रा आदि शामिल हैं और दन लोगों ने पिछले दो दिनों में लगभग सवा तीन सौ मरीजों का परीक्षण करके उन्हें गोलियां दीं। मरीजों राजेन्द्र कुशवाहा, छत्रपाल प्रजापति, देवीदास, मोगली राठौर, भगवानदास पटेल, रामशंकर, धंजू अहिरवार, गंगादेवी, चंद्रमुखी, कैलाशी, गुड्डी, मूर्ति, कस्तूरीदेवी आदि की अगर मानें तो इन दवाओं का असर बीमारी ठीक करने के उलट शरीर में जलन और पैदा करने बाला है। यहां दिलचस्प यह भी है कि जो टीमें गांव में स्वास्थ्य विभाग की पहुंची हैं उनके पास जांच करने की कोई व्यवस्था ही नहीं है, अभी तक स्वास्थ्य विभाग यह भी नहीं बता सका है कि आखिर यह कौन सी बीमारी है?
स्वास्थ्य विभाग हल्के में ले रहा है बीमारी को
चिकित्सक को दिखाने आये मरीज देवीदास का कहना है कि अभी प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को बीमारी की भयावहता का अंदाजा नहीं है और इस मसले को काफी हल्के में लिया जा रहा है जिसके परिणाम भयावह होने से इंकार नहीं किया जा सकता है।
कच्छप गति से चल रहा है स्वास्थ्य विभाग
एक और मरीज राजेन्द्र का कहना है कि बीमारी को लेकर स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने आने में जितना बिलंब किया है उससे ज्यादा बिलंबित कार्यशैली मरीजों की जांच पड़ताल में की जा रही है। खूल के नमूनों की रिपोर्टें दो दिन बाद भी नहीं आना सवाल खड़े काने बाला है। फोटो-कोंच4-राजेन्द्र
प्रशासन को बड़े हादसों का है इंतजार
एक वृद्ध मरीज रामशंकर दवाओं का असर नहीं होने के कारण काफी खफा दिखे, उनका कहना है कि यहां आईं टीम केवल खानापूर्ति करने में जुटी है, बीमारी लगातार अपने पांव पसारती जा रही है और प्रशासन तथा स्वास्थ्य विभाग को इंतजार है बीमारी के कारण होने बाले किसी बड़े हादसे का।







Leave a comment