0 कैकेयी ने दशरथ सेे वरदान मांग राम को भेजा वनवास
0 मंथरा और कैकेयी के संवादों पर खूब तालियां पीटीं दर्शकों ने
कोंच-उरई। रामलीला महोत्सव में बीती रात रामलीला रंगमंच पर राम वनवास लीला का काफी सशक्त मंचन किया गया। सिद्घहस्त रंगकर्मियों ने अपने अपने पात्रों को सजीवता प्रदान करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। खासतौर पर रामलीला ग्राउंड में भरी महिलायें कैकेयी और मंथरा के बीच होने वाले खट्टे मीठे संवादों पर अपनी त्वरित प्रतिक्रिया में खूब तालियां पीटतीं रहीं। समूची प्रस्तुति के दौरान गीतों और संवादों में श्रंृगार, हास्य, करूणा और व्यंग्य का उम्दा घालमेल देखने को मिला। जब कैकेयी राजा दशरथ के समक्ष अपना त्रिया चरित्र दिखाती है और हठपूर्वक अपने दो वरदान मांगने पर अड़ी रहती है तो दर्शक समुदाय की ओर से कैकेयी के लिये भला बुरा कहा जाना इस बात का द्योतक है कि पात्रों ने अपने किरदारों को जीवंतता प्रदान की है।
कोंच की ऐतिहासिक रामलीला के 164वें महोत्सव में बीती रात्रि रामलीला रंगमंच पर राम वनवास लीला का मंचन देखने के लिये रामलीला ग्राउंड दर्शकों से खचाखच भरा था। राजा दशरथ अपने ज्येष्ठ पुत्र को अयोध्या के राज सिंहासन पर आसीन करना चाहते हैं और उनके इस मंतव्य से सभी मंत्रिगण सहमति जताते हैं। राजा का यह मंतव्य सुन स्वर्ग का राजा इंद्र घबरा जाता है कि अगर राम का राज्याभिषेक हो गया तो राक्षसों का संहार कैसे होगा, अतरू सभी देवतागण मां सरस्वती का आह्वान करते हैं और मंथरा की मति भ्रष्ट करने की प्रार्थना करते हैं। माता सरस्वती देवताओं की इस करतूत पर कहती हैं ऊंच निवास नीच करतूती, देख न सकहिं पराई विभूती। रानी कैकेयी की मुंहलगी दासी मंथरा के कानों में जब राम राज्याभिषेक का समाचार आता है तो वह जल भुन जाती है और चिल्लाती हुई कि ऐसा वह कदापि नहीं होने देगी, रनिवास की ओर चली जाती है। उधर, दूसरे दृश्य में रानी कैकेयी अपनी सखियों के साथ महल के उद्यान में झूले का आनंद ले रही है और सखियां गीत गाकर रानी का मन बहला रहीं हैं-
झूले में पवन की आई बहार प्यार छलके, हां प्यार छलके…
इसी बीच वहां मंथरा का वहां प्रवेश होता है और वह अपनी कुटिल चालों से कैकेयी भ्रमित कर देती है। कैकेयी कोप भवन में चली जाती है और फिर प्रारंभ होता है त्रिया चरित्र। दशरथ कैकेयी से गिड़गिड़ा रहे हैं कि भरत के लिये भले ही अयोध्या का सिंहासन ले ले किंतु राम को वन न भेजे। दशरथ की तमाम मान मनौव्वल का कैकेयी पर रंचमात्र भी प्रभाव नहीं पड़ता है और अंततरू राम, सीता और लक्ष्मण वन को चले जाते हैं।
इस बीच दशरथ के गाये मार्मिक गीत ने हजारों दर्शकों को भावुक कर दिया-
कैकेयी न मांगो ये वरदान, चैदह बरस का वन प्रस्थान…
लेकिन कैकेयी भी अपनी जिद पर अड़ी गाती है-
सुन लो सूर्यवंश वरदानी कहती आज ये कैकेयी रानी
प्रतिज्ञा तोड़ो ना तोड़ो ना जो ठानी सो ठानी, सुन लो…
दशरथ का अभिनय बरिष्ठ रंगकर्मी रमेश तिवारी ने निभाया तो कैकेयी का अभिनय रंगकर्मी अतुल शर्मा ने बखूबी निभाया और मंथरा के अभिनय में छब्बीस बर्षों का अनुभव रखने बाले नरोत्तम स्वर्णकार ने जान फूंकी। कौशल्या वीरेन्द्र त्रिपाठी, सुमंत्र मिरकू महाराज, बशिष्ठ शिवम बबेले, सखियों में अभिषेक रिछारिया, ऋतिक याज्ञिक आदि ने निभाये।
मानवीय संवेदनाओं के सर्वोच्च आदर्श हैं राम-एसपी
बीती रात्रि रामलीला देखने आये जिले के पुलिस कप्तान अशोक कुमार त्रिपाठी ने मंच के माध्यम से कहा कि रामलीला या इस तरह के अन्य सांस्कृतिक आयोजन समाज को कुछ न कुछ सीख जरूर देते हैं। रामलीला के नायक राम ने इस समाज को संयमित रहते हुये आदर्श जीवन जीने की कला सिखाई। उन्होंने कहा कि जैसा कि उन्हें विदित हुआ है कि कोंच की रामलीला न केवल अनुष्ठानों और परंपराओं को लेकर जानी जाती है बल्कि इन्हीं बिशेषताओं के कारण इसने भारत में अपनी एक अलग पहचान बनाई है और अयोध्या शोध संस्थान द्वारा विभिन्न सर्वे के आधार पर इसे देश की सर्वश्रेष्ठ मैदानी रामलीला के खिताब से भी नवाजा गया है। यह वास्तव में रामलीला के आयोजकों और यहां की रामसेवा के प्रति समर्पित जनता के लिये बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि लोगों को अपनी सांस्कृतिक विरासत आगे बढाते रहने के प्रयास अवश्य ही करने चाहिये। उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से भगवान राम लोगों को सद्प्रेरणा और सद्भाव का आशीर्वाद देते रहेंगे। इस दौरान सीओ अवधेश कुमार शुक्ल, कोतवाल मनवीर सिंह, एसएसआई एके सिंह, थानेदार रवीन्द्रकुमार त्रिपाठी, विनोद त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
राम को मनाने आज चित्रकूट जायेंगे भरत
भले ही कैकेयी ने अपने प्रिय बेटे भरत के लिये अयोध्या का सिंहासन वरदान में मांग लिया हो और राज्य निष्कंटक करने के लिये राम को चैदह बर्ष का वनवास लेकिन ननिहाल से लौटे भरत ने अपनी मां को खूब खरी खोटी सुनाते हुये अयोध्या के सिंहासन पर बैठने से इंकार कर दिया। उन्होंने घोषणा की कि वह राम को मनाने वन जायेंगे। रामलीला महोत्सव में यह प्रसंग कल 4 अक्टूवर को रात्रि ठीक 8 बजे रामलीला रंगमंच पर श्भरत मनौवा्य लीला में मंचित होगा। उक्ताशय की जानकारी रामलीला समिति के अध्यक्ष सुधीर सोनी व मंत्री सीताशरण पटेल ने दी है।
सागर तालाब में सम्पन्न हुआ गंगापार मेला
रामलीला का पहला मैदानी आयाम गंगापार मेला आज सागर तट पर सम्पन्न हुआ। मेला देखने के लिये सागर तालाब के सभी तटों पर भारी हजूम उमड़ा था। गंगापार के बाद रामगंज बाजार के भ्रमण पर निकले राम, लक्ष्मण और जनकनंदिनी सीता का दुकानदारों ने भव्य स्वागत किया।
चंदेलकालीन ऐतिहासिक सागर तालाब में आज रामलीला की मेला प्रस्तुति गंगापार सम्पन्न हुई। वनवास मिलने के बाद अयोध्या से निकले राम, लक्ष्मण और सीता गंगा तट पर पहुंचते हैं और उनका स्तवन करते हैं। सागर के पूर्वी तट पर गंगापार उतारने के लिये राम केवट को बुलाते हैं तो केवट पहले उनके पांव पखारने की शर्त रखता है और तीनों मूर्तियों के पांव पखार कर उन्हें अपनी नाव से गंगापार कराता है। केवट की भूमिका अतुल चतुर्वेदी ने निभाई। नाव खेने में ढीमर विरादरी के राजेन्द्र चैधरी, घनश्याम, लल्लू रायकवार आदि लगे थे। इस दौरान धर्मादा रक्षिणी सभा के अध्यक्ष केशव बबेले, मंत्री राकेश अग्रवाल, रामलीला समिति के अध्यक्ष सुधीर सोनी, मंत्री सीताशरण पटेल, पालिका चेयरपर्सन प्रतिनिधि विज्ञान विशारद सीरौठिया, अजय गोयल, ओमशंकर अग्रवाल, मिरकू महाराज, राहुल तिवारी, संजय सोनी आदि मौजूद रहे। पुलिस द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये थे, सागर चैकी प्रभारी रवीन्द्रकुमार त्रिपाठी, राजेन्द्रप्रसाद दुवे के नेतृत्व में पुलिस एवं पीएसी बल तालाब के गिर्द घेरा डाले रहे।







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