जालौन-उरई। बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देने वाले पर्व दशहरा के अवसर पर बुराई रूपी रावण के पुतले का दहन कर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाता है। दशहरा के पावन पर्व दहन के लिए रावण का पुतला बनाने के लिए नगर के एकमात्र कारीगर कासिम खां महीनों पहले से इसको बनाने की तैयारी शुरू कर देते हैं। इस वर्ष पुतला दहन में आतिशबाजी से बना बंदर व कछुवा रहेगा आकर्षण का केेंद्र।
नगर के मुहल्ला पुरानी नझाई निवासी 72 वर्षीय कासिम खां लगभग एक महीने पहले से रावण-दहन के लिए पुतले को बनाने के लिए मेहनत कर रहे हैं। इस वर्ष दहन के लिए बनाए जा रहे रावण के पुतले को अंतिम रूप देते हुए बताया कि उन्होंने इस वर्ष 45 फुट ऊंचे पुतले का निर्माण किया है। कासिम खां पिछले 22 वर्षों से रावण के पुतले को बनाते चले आ रहे हैं। वह बताते हैं कि बचपन से ही उन्हें पुतले बनाने का शौक था। मुस्लिम धर्म में जन्मे होने के बावजूद कासिम खां के मन में हमेशा यह विचार आता था कि वह हिंदू धर्म के बुराई पर अच्छाई की जीत को दर्शाने वाले पर्व दशहरा के लिए बुराई रूपी रावण के पुतले का निर्माण करें। गरीब और निर्धन परिवार में जन्म होने के कारण, वह ज्यादा पढ़-लिख तो नहीं सके लेकिन उन्होंने मेहनत-मजदूरी करने से कभी मुंह नहीं मोड़ा। इस प्रकार उन्होंने मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण किया। कासिम ऊपर वाले का शुक्रिया अदा करते हुए कहते हैं कि उसने मुझे जो हुनर दिया है, उसका मैं सही उपयोग कर रहा हूं, यही मेरे लिए बहुत है। कासिम की पत्नी नूरबक्स चने आदि को भूंजकर पैसा कमाती थी। अब उनके पास अपनी कला के अलावा और कोई रोजगार नहीं है। कासिम कहते हैं कि मेरे मन में जितनी खुशी मुस्लिम त्योहारों को लेकर रहती है, उससे कहीं अधिक खुशी हिंदू त्योहारों को लेकर रहती है। हमारी सोच हमेशा यही रही है कि सभी हिंदू और मुस्लिम भाइयों को एक-दूसरे के सभी त्योहार साथ मिलकर मनाने चाहिए और हमारे नगरवासी हिंदू-मुस्लिम एकता के यह जीते-जागते उदाहरण हैं। मुझे खुशी होती है कि हमारे नगरवासियों ने कभी सांप्रदायिकता को बढ़ावा नहीं दिया। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए वह बताते हैं कि उन्होंने सर्वप्रथम 6 फुट ऊंचा रावण का पुतला मात्र 50 रूपए में बनाना प्रारम्भ किया था। जो बाद में धीरे-धीरे 10, 15, 25 तथा 35 फुट का होता गया। और अब इस वर्ष 45 फुट का पुतला बनाया गया है। वह कहते हैं कि उनमें रावण के पुतले को बनाने के लिए जिज्ञासा तो थी लेकिन कोई प्रेरक नहीं मिल रहा था। तभी, लगभग 22 वर्ष पूर्व रामलीला समिति के मंत्री उमाशंकर चतुर्वेदी ने प्रथम बार रावण के पुतले को बनवाकर मेरे मन की इच्छाऐं पूरी कर दीं। तब से हर वर्ष वहीं पुतले का निर्माण कर रहे हैं। पुतले बनाने में कागज, लेई, बांस, फेविकोल, गोटा, पन्नी, सन, सुतली तथा मिट्टी का प्रयोग किया जाता है। उधर, दशहरा समिति के कोषाध्यक्ष पं. गौरीश द्विवेदी ने बताया कि इस वर्ष रावण के पुतले के दहन में आतिशबाजी से बनने वाला बंदर तथा कछुआ की छवियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी।







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