जालौन-उरई। नवरात्रि के तीसरे दिन नगर में स्थापित देवी पंडालों तथा देवी मंदिरों पर देवी चंद्रघंटा के मंत्र ‘अतिसौम्यातिरौद्रायै नतास्तस्यै नमो नमः, नमो जगत्प्रतिष्ठायै देव्यै कृत्यै नमो नमः’ का नगर में चहुंओर गुंजायमान हो रहा था। देवीभक्तों ने विभिन्न देवी पंडालों व देवी मंदिरों पर जाकर देवी मां की स्तुति की।
शरदीय नवरात्रि पर नगर में दो दर्जन से अधिक स्थानों पर पांडालों में देवीजी की स्थापना की गई है। जिसके तीसरे दिन देवी मां के तृतीय स्वरूप ‘चंद्रघंटा’ के दर्शन के लिए सुबह से शाम तक देवी भक्तों का तांता लगा है। देवी मां के श्रृंगार में माता के शिख पर चंद्र तथा हस्त में घंटा लटकाया गया। देवी सरस्वती के इस रूप में आह्वान, संकल्प और नाद की आराधना की जाती है। माना जाता है कि देवासुर संग्राम में देवी ने घंटे की नाद से अनेकानेक असुरों का दमन किया था। मां चंद्रघंटा नाद के साथ शांति का भी संदेश देती हैं। देवी भक्तों ने माता चंद्रघंटा के मंत्र ‘अतिसौम्यातिरौद्रायै नतास्तस्यै नमो नमः, नमो जगत्प्रतिष्ठायै देव्यै कृत्यै नमो नमः’ का जाप कर आसुरी प्रवृत्ति के दमन तथा सर्वत्र शांति की कामना की।







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