0 अनियमितताओं का गिरोह बनकर रह गई चयन समिति
0 समिति प्रभारियों को चीन्ह-चीन्ह कर बांटी रेवड़ियां
0 समिति प्रभारियों को थमा दिए बैंक कैडर सचिव के पद
उरई। सहकारिता विभाग के अधिकारियों ने पैक्स कैडर सचिव की भर्ती के नाम पर सहकारी समितियों के बाबूओं को कैडर सचिव के पद बांट डाले जबकि समिति के बाबुओं को बैंक में जाने का सहकारिता नियमावली में कहीं कोई प्रावधान नही है लेकिन संयुक्त आयुक्त एवं संयुक्त निबंधक सहकारिता झांसी मंडल झांसी ने मानकों की धज्जिया उड़ाते हुए कोआपरेटिव बैंकों में सचिव के पद पर सहकारी समितियों के बाबुओं की भर्ती कर डाली इसके लिए वकायदा चयन समिति का ढांेग भी रचा गया।
सहकारी समिति कर्मचारी सेवा नियमावली 1999 के अनुसार समिति के कर्मचारियों को कैडर सचिव के रूप में पदोन्नति देने का कहीं कोई प्रावधान नही है। उत्तर प्रदेश प्राइमरी सहकारी समिति के केन्द्रीय सेवा बिनियमावली 1976 में कैडर सचिव की चयन की व्यवस्था की गई थी जिसमें सहकारिता विभाग में सहायक विकास अधिकारी अथवा इससे ऊपर के पदधारक का ही स्थानांतरण किया जा सकता है। जबकि इसके नीचे के सभी कर्मचारी सहकारी स्थानांतरण कर्मचारी की श्रेणी में नही आते है। समिति के बाबू प्रभारी सचिव को या कैडर सचिव को होम ब्लाक या समिति के बाबू को उसी समिति में नही रखा जाता जैसा कि नियमावली 1976 में निर्देशित किया गया है। प्रभारी सचिव को किसी भी सूरत में सचिव स्तर के लिए निर्देशित नही किया जा सकता है। लेकिन चयन समिति के सभापति एके पांडेय ने शासन के अधिकारियों सांठ-गांठ कर मानकों की धज्जिया उडाकर जमकर मनमानी कर डाली इसके लिए सभापति एके पांडेय के साथ ही चयन समिति में बीरेन्द्र कुमार, सहायक निबंधक उरई दिनेश चंद्रा जिला सहकारी बैंक उरई और मुलायम सिंह मनोनीत सदस्य को शामिल कर इस कारनामे को अंजाम दे डाला। चयन समिति के समक्ष सहकारी समिति के कर्मचारियों के कुल 27 आवेदन पत्र आए थे जिसमेें सामान्य वर्ग के 15 अन्य पिछड़ा वर्ग के 9 और अनुसूचित जाति के तीन कर्मचारी शामिल थे। अब्बल तो यह कि सहकारी समिति के कर्मचारियों को जब पदोन्नति का कहीं कोई अधिकार नही है तो फिर इन कर्मचारियों के आवेदन क्यों जमा कराए गए। सूत्रों की माने तो इस खेल में विभाग के कुछ बड़े अधिकारियों की भी मिलीभगत मानी जा रही है। जिसके चलते इतने बड़े घोटाले को अंजाम देकर सहकारी समितियों के 22 कर्मचारियों को बैंकों के कैडर सचिव के पद बांट दिए गए। चर्चा तो यह भी है कि समितियों में कैडर सचिव बनाए गए प्रत्येक कर्मचारी से एक से लेकर दो लाख तक की सुविधा शुल्क वसूल की जा रही है जिसके चलते चयन समिति ने मानकों की धज्जिया उड़ाने में कोई कसर नही छोड़ी है। भारतीय जनता पार्टी के भाजपा के पूर्व नगर अध्यक्ष हरेन्द्र विक्रम सिंह वरिष्ठ नेता राकेश तिवारी ने कैडर सचिव के नाम पर सहकारिता विभाग में हुए इस घोटाले की ओर शासन का ध्यान आकृष्ट करते हुए शासन स्तर के अधिकारियों से जांच कराए जाने की मांग की है।
इंसेट–
इन लोगों को दिया गया प्रमोशन
उरई। सहकारी समिति ऐर के कर्मचारी चंद्रपाल को डकोर का कैडर सचिव बनाया गया है इसी तरह सोमप्रकाश को कुकरगांव में ही कैडर सचिव बना दिया गया। सर्वेश श्रीवास्तव को कुकरगांव से मड़ोरा क्षेत्रीय सहकारी समिति, अशोक कुमार को इटौरा से जैसारी कला, रामजी गौतम को आटा से खर्रा, जयनारायन झा को जुझारपुरा से वहीं का कैडर बना दिया गया। ब्रजकिशोर निरंजन अंडा को अंडा, बीरेन्द्र कुमार को टीहर से नावर, भगवती प्रसाद को नावर से टीहर, श्रीनिवास गुप्ता को ऊमरी से गोहन, वनस्पति सिंह को कुठौंद से कुठौंद, भारत सिंह याज्ञिक को वावली से भदेख, जसवंत सिंह को वावली से वावली, नीरज वर्मा को खर्रा से ऐर, मनीष कुमार को इटौरा से आटा, प्रदीप कुमार दुबे को महेबा से महेबा, सुरेन्द्र सिंह को बाबई से बाबई, दौलत सिंह को नदीगांव से गोपालपुरा, सुरेन्द्र पाल शिवहरे को कनासी से नदीगांव, करनकुमार मिश्रा को एट से एट, राजेन्द्र यादव से जुझारपुरा से कनासी का कैडर सचिव बना दिया गया आश्चर्य की बात तो यह है कि जुझारपुरा, अंडा, कुठौंद, वावली, महेबा, बाबई, एट, सहित कई समितियां ऐसी है जिनके प्रभारियों को वहीं के कैडर सचिव के पद पर पदोन्नति कर दिया गया। यहीं नही होम ब्लाक में किसी भी कर्मचारी को पदोन्नति नही दी जा सकती लेकिन चयन समिति ने इस कारनामे को भी अंजाम दे डाला कई कर्मचारियों को होम ब्लाक में इधर से उधर स्थानांतरण कर दिया गया जो कि नही होना चाहिए था।






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