उरई। अब कुछ मुकदमें अदालत में हाजिर हुए बिना भी निस्तारित कराये जा सकते हैं। उच्च न्यायालय की पावर ज्योति एकाउंट सरल पेटी आॅफेन्स फाइंड डिपोजिट स्कीम में इसका प्रावधान कर दिया गया है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव अलका भारती ने इस सिलसिले में बताया कि विभिन्न न्यायालयों में लंबित लघु आपराधिक मुकदमें अगर उनके वादकारी आगे ट्रायल नही चाहते अथवा किन्ही कारणों से न्यायालय में उपस्थित नही हो पाते तो यह सुविधा उनके लिए है।
इसमें मोटरयान अधिनियम के चालान, पुलिस के चालान, जुआ अधिनियम, क्षेत्र व जिला पंचायत अधिनियम के चालान के बारे में संबंधित न्यायालय द्वारा निर्धारित अर्थदंड का सम्मन दिया जाने पर प्रतिवादी भारतीय स्टेट बैंक की किसी भी शाखा में न्यायालय के खाते में धनराशि जमा करा दे और उसकी सूचना संबंधित न्यायालय को भेज दे। उसका मुकदमा विधि सम्मत के अनुरूप निपटा दिया जायेगा।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में खाता संख्या, न्यायालय का नाम, मुकदमे का विवरण, बैंक जमा पर्ची सहित अन्य विवरण संबंधित न्यायालय द्वारा विशेष सम्मन के माध्यम् से अभियुक्त को प्रेषित किया जायेगा। उन्होंने बताया कि यह कदम आपराधिक न्याय प्रणाली में न्याय को और सुविधापूर्ण तरीके से वादकारी को उपलब्ध कराने और समाज में आ रहे तीव्र परिवर्तन को दृष्टिगत रखते हुए समय की बचत व न्याय को वादकारी के द्वार तक पहुंचाने की प्रक्रिया का हिस्सा है।






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