13oct2016-20 बुन्देलखण्ड सूखा पीड़ित-जन संवाद
उरई। बुन्देलखण्ड में सूखा, भुखमरी, पलायन व सूखे के कारण दलित बंचित परिवारों के हालात पर बुन्देलखण्ड दलित अधिकार मंच व नेशनल दलित वाॅच एवं राष्ट्रीय दलित मानवाधिकार अभियान दिल्ली की ओर से किये गये बुन्देलखण्ड के जालौन, झांसी व महोवा के 85 गावों में आपदा एंव सूखा राहत आंकलन व जिलावार सूखा राहत हेतू कराये गये आवेदनों एंव उस पर गांव वार पहुची सूखा राहत की यथास्थिति को लेकर आज जेल रोड सरकार पैलेस में बुन्देलखण्ड के सुखा पीडितों के साथ जन संवाद कार्यक्रम किया गया जिसमें 7 सदस्यीय पैनल में संजय सिंह सचिव परमार्थ राष्टीय संयोजक जल जन जोडो अभियान, राघेकृष्ण श्रीवास्तव समर्पण,भग्गूलाल वाल्मीकि, रामशरण गौतम एडवोकेट ने सूखापीडितों की व्यथा सुनी।
बुन्देलखण्ड के अलग अलग गांव से आये लोगों ने अपनी व्यथा रखी जिसमें प्रमोद नरहान, शकुन्तला, राजरानी शेखपुर गुडा ने बताया कि हमें सूखा राहत नही मिला है। कमला दहेलखण्ड, सरोज मंगरौल, भारतसिंह गुडाखास तुलसीराम वाल्मीकि राजकुमार, उर्मिला दहेलखण्ड ने कहा कि मेरे पास खाने के लिये कुछ नही है। सरकार कुछ मदद नही कर रही है। देहेलखण्ड की संतोषी, व दलबीर, नरहान से रीता विश्वकर्मा, उरकरा कला से रामकुमार गौतम, मडैया से धर्मपाल राजपूत, महिपाल सिंह सिरसा दोगडी, ने अपने अपने गावं की ब्यथा रखी लोग भूख से बेहाल है लोग पलायन कर रहे है। संतोष कुमार गौतम, विमल कुमार बौद्ध, नन्द कुमार, लक्ष्मी गौतम, आरती, अनीता, प्रगति गौतम, कृपाराम छोटेलाल ने बताया कि हमारे यहो अब तक कोई मुआवजा नही मिला है। लोग दाने दाने के लिये परेशानहै। महोवा से बृजेन्द्र सिंह ने बताया कि महोवा में हमारे कुछ लोगोंको मदद मिली लेकिन अभी कुछ लोग बाकी है। झांसी से उमेश ने बताया हमारी तहसील में लोगों को मुआवजा मिला है लेकिन लेखपालों ने पैसे लिये है।
जनसंवाद में बुन्देलखण्ड दलित अधिकार मंच के संयोजक-कुलदीप कुमार बौद्ध ने पैनल व लोगों के समक्ष सूखा राहत की यथा स्थिति रिर्पोट को रखा जिसमें बताया मंच द्वारा किये गये कार्य से व्यापक असर हुये 75 प्रतिशत दलित परिवारों की पुनः सर्वे हुई व चैंके मिली एंव दलित परिवारों को 3 माह तक निशुल्क राशन भी प्राप्त हुआ यह बडा परिणाम रहावही अभी बहुत से लोग सूखा राहत पाने से वंचित है जिनके लिये मंच आगे संघर्ष करेगा। पैनल सदस्य संजय सिंह ने कहा कि हम सबको अपने हक की लड़ाई के लिये सबको आगे आना होगा जब हम सब लोग मिलकर पहल करेंगें तो सरकारें झुकेंगी , जब तक गांव के लोग सशक्त नही होगें कुछ बदलाव नही हो सकता। अनिल वर्मा वरिष्ठ पत्रकार ने कहा कि आगामी चुनाव में हमें इसको मुददा बनाना पडेगा। भग्गू लाल बाल्मीकि ने कहा कि सवसे ज्यादा सूखा से पीडित परिवार बाल्मीकि समुदाय से है। जिन परकिसी ने घ्यान नही दिया है। न ही उन्हे कोई मुआवजा नही मिला है। क्योंकि उनके पास न ही जमीन है। न ही पैसा तो सरकार को उस पर विशेष ध्यान देना होगा। राधेकृष्ण श्रीवास्तव समर्पण जन कल्याण समिति ने कहा गावं के लागों के हक को मारने बाले कभी सुख चैन से नही रह पायेंगें। अब हम सबको संगठित होकर मिलकर लडना होगा। नेशनल दलित वाच व राश्टीय दलित मानवधिकार अभियान से राजेश सिंहने कहा कि दलितों के साथ सुखा में होने वाले भेदभाव को सरकार को मानना पडेगा ।
जूरी मैम्बर ने अपनी अपनी सिफारिसें दी, गांव के लोगों की समस्याओं व मुददों पर आगे जिलाधिकारी को फिर से ज्ञापन दिया जायेगा व जरूरत पडने पर सूखा से बंचित लोगों की तरफ से कोर्ट में जनहित याचिका दायर की जायेगी। अन्त में कार्यक्रम में सभी ने निर्णय लिया कि यदि एक माह में सुखा से पीड़ित लोगों को राहत नही मिली तो अगले माह नवम्बर में संविधान दिवस पर बुन्देलखण्ड से ये सभी हजारों दलित सूखा पीड़ित बुन्देलखण्ड से विधान सभा लखनऊ तक अपने हक व न्याय के लिये यात्रा करेगें व राज्यपाल के सामने अपने हक की गुहार लागायेंगें। कार्यक्रम में रामकुमार, सुरेन्द्र, महिपाल, कमलेशी पाल, रिहाना मंसुरी, लक्ष्मी गौतम, राधा सहित कार्यक्रम में जालौन, झांसी व महोवा से 80 गांव केसैकडों सूखा से दलित पीडितों ने सहभागिता की।

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