उरई। बुधवार को बिरसा मुंडा जयंती के उपलक्ष्य में बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच ने दलित स्वाभिमान संघर्ष यात्रा दमरास से शुरू की। इस अवसर पर मंच के संयोजक कुलदीप कुमार बौद्ध ने बताया कि उनकी यात्रा जालौन के अलावा झांसी, ललितपुर, हमीरपुर, बांदा व चित्रकूट आदि जिलों का भ्रमण करती हुई 26 नवंबर को भारतीय संविधान दिवस पर विसर्जित होगी।
बौद्ध ने बताया कि बुंदेलखंड में दलितों की स्थिति अभी भी दयनीय बनी हुई है। उनके साथ जातिगत कारणों से कदम-कदम पर भेदभाव होता है। अधूरे मन से प्रयास होने के कारण दलितों के शैक्षिक उत्थान और उन्हें स्वास्थ्य, पेयजल, बिजली आदि सुविधाएं मुहैया कराने में प्रगति नही हो पा रही। मैला ढोने की प्रथा कागजों में भले ही खत्म हो गई हो लेकिन व्यवहारिक तौर पर इसका अस्तित्व कायम है। बौद्ध ने दलितों की इस स्थिति को बदलने के लिए संघर्ष का रास्ता अपनाने का आवाहन किया। उन्होंने कहा कि दलित पिछड़ा और अल्पसंख्यक जब तक एक जुट नही होंगे तब तक सामाजिक परिवर्तन संभव नही है।







Leave a comment