उरई। जनपद मुख्यालय को जोड़ने वाला उरई, करमेर-इटौरा मार्ग अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। इस मार्ग पर प्रतिदिन यात्रा करने वाले ग्रामीण, शिक्षक कर्मचारियों ने योगी सरकार के पंद्रह जून तक गड्ढामुक्त सड़क होने के फरमान से काफी उम्मीदें लगा रखी थीं लेकिन जिला स्तर के अधिकारियों ने उनके फरमान को पलीता लगा रखा है।
एक ओर शासन व प्रशासन इस बात पर जोर दे रहा है कि शिक्षक कर्मचारी ,चिकित्सक आदि ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूल, ऑफिस व अस्पतालों में समय से पहुंचे व जनता को सरकारी योजनाओं का ज्यादा से ज्यादा लाभ दिलाया जाये। वहीं सड़कों के क्षतिग्रस्त होने से सरकार का यह मंसूबा पूरा होते नहीं दिख रहा है। एससी एसटी बेसिक टीचर्स वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष सुंदर सिंह शास्त्री कहते है कि सरकार की मंशा अच्छी थी लेकिन जिले के जिम्मेदार अधिकारियों के ढुलमुल रवैया के कारण प्रतिदिन यात्रा करने वाले राहगीरों के साथ ही शिक्षकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है क्योंकि खराब सड़क होने की बजह से हुई देरी पर अधिकारियों द्वारा तुरन्त शिक्षकों के खिलाफ दण्डात्मक कार्यवाही की जाती है जबकि इसका दोषी शिक्षक नही होता है खराब सड़कों के कारण विद्यालय पहुँचने में दुगुना समय व्यय करना पड़ता है। कभी-कभी खराब सड़क के कारण बड़ी दुर्घटनाएं होती है और उन्हें अपनी जान तक गवानी पड़ती है। उन्होंने जिला प्रशासन का इस ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए उरई करमेर रोड की मरम्मत कराये जाने की मांग की है।

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