उरई। गुरुवार की शाम भुआ स्टेशन के पास राप्तीसागर एक्सप्रेस में फिशप्लेट टकराने के मामले की जांच को लेकर रेलवे बेहद लापरवाही बरत रही है। जांच के लिए इलाहाबाद मुख्यालय से आए प्रमुख मुख्य अभियंता ने घटनास्थल पर रुकने की बजाय कर्मचारियों की आँखों से हकीकत देख ली। उनकी इस कार्यशैली को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि बड़ा हादसा हो जाता है रेलवे प्रशासन आतंकी घटना बताने में जुट जाता है लेकिन हल्की घटनाओं को शरारत बताने लगता है।
मालूम हो कि गुरुवार को गोरखपुर से त्रिवेंद्रम जाने वाली राप्तीसागर एक्सप्रेस जब उरई से झांसी स्टेशन के लिए रवाना हुई तो भुआ स्टेशन से तीन किलोमीटर पहले रेलवे ट्रैक पर रखी फिश प्लेट से ट्रेन का इंजन टकरा गया। जिससे एक फिशप्लेट तो उछलकर दूर जा गिरी। जबकि दूसरी फिशप्लेट से इंजन का गियर केस क्षतिग्रस्त हो गया था। जिससे ट्रेन बमुश्किल भुआ स्टेशन पहुंच पाई थी। वहां पहुंचने के बाद इंजन ने आगे जाने से जवाब दे दिया। तब किसी तरह मालगाड़ी का इंजन लगाकर इसे गंतव्य की ओर रवाना किया गया था।
बरहराल जिस तरीके से रेलवे ट्रैक पर फिश प्लेट रखी हुई मिली। उसे लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। कोई इसे आतंकी साजिश बता रहा है तो कोई इसे किसी की शरारत। जबकि कोई इसे रेल कर्मचारियों की लापरवाही बताने पर जोर दे रहा है। रेल कर्मचारी बता रहे है कि रेलवे ट्रैक के दोहरीकरण का जो काम चल रहा है। उसी की फिश प्लेट ट्रैक के किनारे पड़ी है। जिनमें तीन फिशप्लेट किसी शरारतीतत्व ने ट्रैक पर रख दी है। हालांकि जिस तरीके से टै्रक पर फिशप्लेट टै्रक पर रखी थी और उससे इंजन क्षतिग्रस्त हुआ। इसके बाद जिस तरह इंजन के चालक एनआर कुशवाहा ने कंट्रोल रुम को हादसे की सूचना दी। उससे हडक़ंप मच गया। आनन फानन में स्थानीय अधिकारी मौके पर भी पहुंच गए थे और ट्रैक पर फिश प्लेट रखे जाने को लेकर अलग अलग तर्क दे रहे थे।
बरहराल  लोगों का कहना है कि जिस तरह ट्रैक पर फिश प्लेट रखी थी। उसे लेकर आतंकी साजिश को पहलू बनाकर जांच करनी चाहिए क्योंकि नवंबर 2016 में जिस तरीके से पुखरायां (कानपुर हेदात) इंदौर पटना ट्रेन के हादसे के बाद पहले अधिकारी लापरवाही बताते रहे लेकिन बाद में यह आतंकी घटना घोषित की गई। उसी तरह इस हादसे को लेकर भी रेल अधिकारी शरारत बता रहे हैं। लेकिन इसकी गंभीरता से जांच को लेकर गंभीर नहीं है। हालांकि राप्तीसागर के यात्रियों को शक है कि कहीं यह आतंकियों द्वारा ट्रेन को पलटाने की साजिश तो नहीं है।
आज इलाहाबाद मुख्यालय से निरीक्षण को आए प्रमुख मुख्य अभियंता संजीव राय, सीनियर डीईएन झांसी मंडल केके तलरेजा ने राप्तीसागर में लगे विशेष कोच के शीशे से जिस तरह कोच में बैठे बैठे ही रेलवे ट्रैक का निरीक्षण कर लिया। उसे देखकर लग रहा है कि रेल अधिकारी इस हादसे को लेकर कितने गंभीर है। इतना ही नहीं हादसे से संबंधित सवाल को लेकर भी उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
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आतंकी साजिश नहीं-कमांडेंट
उरई। आरपीएफ के कमांडेट आशीष मिश्रा का कहना है कि यह आतंकी घटना नहीं है। क्योंकि ट्रैक के दोहरीकरण का काम रेल विकास निगम लिमिटेड द्वारा कराया जा रहा है। हो सकता है कि किसी कर्मचारी ने टै्रक पर फिश प्लेट छोड़ दी हो या फिर किसी शरारतीतत्व  ने ट्रैक पर यह फिश प्लेट रख दी हो।
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