उरई । जल पुरुष के नाम से चर्चित और मेगसायसाय अवार्ड से सम्मानित राजेन्द्र सिंह ने बुंदेलखंड को पानीदार बनाने के लिए इसरायली माडल के रूमानी प्रस्तुतिकरण को नकार दिया है । उन्होने कहा की वे खुद इस्रायल रहे हैं इसलिये उनकी खामियों को जानते हैं । इस्रायल जल साम्राज्यवादी है जिसने फिलीस्तीन की अनदेखी कर जॉर्डन नदी पर कब्जा करके उसे रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत कर दिया । दूसरी ओर भारत ने अपने यहाँ से पाकिस्तान ,बंग्लादेश , चीन और नेपाल पहुँचने वाली नदियों को ले कर  उन पर एकाधिकार करने की बजाय सभी के लिए न्यायसंगत समझौते किए हैं ।

उन्होने बताया कि महाराष्ट्र और कर्नाटक में माइक्रो इरीग्रेशन की आयातित तकनीक को अपनाने के बहुत बुरे नतीजे सामने आए । इस पर भारी बजट खर्च किया गया जो बड़ी कंपनियों की जेब में चला गया जबकि  इनके कारण जल श्रोत मिट गए जिससे 2015 और 2016  में सारी फसलें सूख गयीं और किसानों को भीषण बर्बादी का सामना करना पड़ा । राजेन्द्र सिंह का कहना है कि बुंदेलखंड जैसे इलाक़ों में पानी के अकाल की समस्या प्राकृतिक विपदा नहीं है, यह मानव जनित संकट है । भारत जल तकनीक के मामले में जगदगुरु रहा है , उसे इस क्षेत्र में किसी का मुँह ताकने की जरूरत नहीं है । सरकार द्वारा  किए गए बिगाड़ को जल निकायों के परम्परागत सामुदायिक प्रबंधन को बहाल करके ठीक किया जा सकता है ।

उन्होने बताया कि इसी इरादे से गत 15 मई को दिल्ली में राष्ट्रीय जल साक्षरता अभियान शुरू करने की घोषणा की गई है । इसके अंतर्गत कन्याकुमारी से कश्मीर तक और गोवा से गुवाहाटी तक 2 बड़ी यात्राएं शुरू कराई गई हैं जबकि 101 छोटी यात्राएं निकाली जानी हैं जो बुंदेलखंड से शुरू होंगी और जिनका समापन 15 अगस्त को कर्नाटक के बीजापुर शहर में होगा । इसके बाद 16 से 18 अगस्त  तक तीन दिन के सम्मेलन भारतीय राज और समाज की बेहतरी की कार्ययोजना बनाई जायेगी ।

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