उरई।केंद्र व राज्य सरकार द्वारा संचालित मदरसों के आधुनिकीकरण की योजना जिला अल्पसंख्यक कार्यालय की लापरवाही से दम तोड़ती नजर आ रही है। आधुनिकीकरण योजना से आच्छादित मदरसों के शिक्षकों का एक वर्ष से अधिक समय से रुका मानदेय न मिलने से शिक्षक भुखमरी की कगार पर पहुंच गये हैं। ऐसी स्थिति में मदरसा संचालक जब अल्पसंख्यक कार्यालय में पहुंचते हैं तो वहां पर विभागीय अधिकारी कुर्सी से गायब रहते हैं।
लंबे समय से उपेक्षा के चलते दुखी मदरसा संचालकों ने आज मुख्यंत्री को संबोधित पांच सूत्रीय ज्ञापन जिलाधिकारी नरेंद्र शंकर पांडेय को सौंपा जिसमें कहा गया कि मानकों को पूरा करने वाले मदरसों में तीन शिक्षकों को नियमित किया जाये। मदरसों में कामिल तथा फाजिल की डिग्री को विश्वविद्यालयों से जोड़ा जाये। आलिया, उच्च आलिया स्तर के मदरसों में कम्प्यूटर कार्य के लिये एक नियमित कम्प्यूटर शिक्षक प्रत्येक मदरसों को दिया जाये। आलिया व उच्च आलिया स्तर के मदरसों को स्काउट गाइड (एनसीसी) शिक्षा तथा एनएसएस जैसी योजना से जोड़ा जाये। मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षकों को मिलने वाले राज्यांश व केंद्रांश के बराबर किया जाये। मदरसा संचालकों का कहना था कि जनपद जालौन में मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत आच्छादित मदरसे संचालित हैं। वर्तमान में हमारे मदरसों को राज्य सरकार से राज्यांश धनराशि भी प्राप्त हुयी है तथा समय-समय पर मदरसों का स्थलीय निरीक्षण, जांच भी हुयी। जांच उपरांत मदरसों का पूर्व में केंद्रांश तथा वर्तमान में राज्यांश धनराशि का भुगतान भी किया गया है। इस दौरान दो दर्जन से अधिक मदरसा संचालक व शिक्षक उपस्थित रहे।

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