कालपी -उरई । डाक्टरों की मनमानी थमती नजर नहींं आ रही है। बीती रात पत्नी का इलाज कराने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य पहुंचे युवक को दुत्कार कर भगा दिया। मोहल्ला महमूदपुरा निवासी लखनलाल ने आरोप लगाया कि रात में हालत बिगडऩे पर अपनी पत्नी का इलाज कराने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कालपी गया तो ड्यूटी में मौजूद कर्मचारियों ने अभद्रता करते हुए से इलाज करने से मना कर दिया। इसकी शिकायत उन्होंने उच्च अधिकारियों से करते हुए दोषी डॉक्टर तथा कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है ।
लखन लाल के अनुसार बीती 9 जुलाई की रात्रि में उसकी पत्नी की तबीयत खराब हो गयी। बीमार पत्नी का इलाज कराने के लिए जब सरकारी अस्पताल पहुंचे तो ड्यूटी में चिकित्सक मौजूद नहीं था ।काउंटर में मौजूद कर्मचारी नशे में चूर दिखाई दे रहे थे। पत्नी का इलाज करने की गुहार लगाने पर कर्मचारी बदतमीजी करने पर उतारु हो गये। ड्यूटी में मौजूद चिकित्सक से उनके फोन से बात करने पर डॉक्टर ने कहा कि हमारे सोने का वक्त है। हम इलाज नहीं कर पाएंगे ।इसलिए अस्पताल से भाग जाओ। रात मैं ही प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक वह फोन के माध्यम से इलाज ना करने की जानकारी दी गई चिकित्सा अधीक्षक ने कहा कि हम तो कानपुर में है। सुबह कालपी आकर को देखेंगे। उपचार ना होते देख कर मजबूरीवश लखनलाल अपनी पत्नी को रात में ही प्राइवेट डॉक्टर के यहां ले गया। और इलाज कराया परिणामस्वरूप बीमार पत्नी की जान बच सकी। लखनलाल ने जिला अधिकारी एसडीएम, मुख्य चिकित्सा अधिकारी तथा संबंधित उच्च अधिकारियों को शिकायत के माध्यम से अवगत कराते हुए दोषी डॉक्टर तथा कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। वही पत्रकार संगठनों ने भी जिम्मेदार डॉक्टर तथा कर्मचारियों की संवेदनहीनता पर नाराजगी प्रकट की है।
ट्रांसफर के बाद भी डटे हैं चिकित्सा अधीक्षक
बता दें कि कालपी में तैनात चिकित्सा अधीक्षक मुलायम सिंह का स्थानांतरण दो माह पूर्व उरई के महिला अस्पताल में किया जा चुका हैं। कारण यह भी हैं कि चिकित्सा अधीक्षक का कालपी में आवास बना हुुआ हैं। इस वजह से वह कभी कभार ही अस्पताल आते हैं। जिसके चलते मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सब कुछ जानने के बाद भी अधिकारी अनजान बना हुआ है।







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