कानपुर रविवार। मिड नाइट डायरी व अनुकृति रंगमंडल कानपुर द्वारा आयोजित कार्यक्रम ओपन माइक कानपुर चेप्टर 1.0 में आज युवा प्रतिभाओं के साथ ही वरिष्ठ रंगकर्मियों ने भी कविता, कहानी और संस्मरण प्रस्तुत कर उपस्थित दर्शकों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए राघवेंद्र व हिमांशु ने अमिता गौतम को माइक पर आमंत्रित किया। अमिता ने

की कविता क्या लिखूं पढ़ी। इसके बाद सम्राट यादव ने कानपुर की संस्कृति पर कुछ संस्मरण प्रस्तुत कर उपस्थित दर्शकों को ठहाके लगाने को विवश कर दिया।

 

राघवेंद्र प्रजापति ने कविता बचपन में खो जाना चाहता हूं…, आकाश ने कालेज लाइफ पर हास्य, धीरेंद्र गौतम व दिव्यांशु

ने कविता, अनुभव ने ग़ज़ल, मिड नाइट डायरी के अमन सिंह ने कहानी स्वयं से प्रेरित प्रस्तुत की।

वरिष्ठ रंगकर्मी व कार्यक्रम संयोजक डा. ओमेन्द्र कुमार की कविता …

आंखें तलाशती हैं …

वो नेकर वाला बचपन

होम वर्क छूटने पर

स्कूल न जाने के बहाने

बारिश में कापी के पन्ने से नाव बनाना…

शिद्दत से जब भी किया बीते दिनों को महसूस…

पाया है तो सब कुछ पहले जैसा

बस हम ही थोड़ा बड़े हो गये हैं

बच्चे थे हम पहले, अब हम बच्चों के पिता हो गये हैं… ने उपस्थित लोगों को भाव विभोर किया। रंगकर्मी महेंद्र धुरिया, देवेंद्र सिंह व जब्बार अकरम द्वारा प्रस्तुत नाटकों के संवादों पर खूब तालियां बजीं। इस दौरान सुरेंद्र श्रीवास्तव, अनुज सिंह, प्रताप साहनी, अमरदीप कटियार, सोनी गौतम मौजूद रहे।


Mid Night

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