
उरई-| भारत की प्रथम महिला शिक्षिका और नारी मुक्ति की प्रणेता राष्ट्रमाता साबित्रीबाई फुले के जन्म दिवस पर बुंदेलखंड क्षेत्र के दलितों,वन्चितों व महिलाओं की आवाज, सामाजिक संगठन– बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच व साथी संगठनों द्वारा बुधवार को कलेक्ट्रेट परिसर में जिलाधिकारी कार्यालय के सामने शिक्षा संकल्प सभा की व जिले के अलग अलग गावं से माता साबित्रीबाई फुले का रूप धारण करके आई स्कूली बच्चियों ने शिक्षा ब्यबस्था में सुधार हेतु अपना ज्ञापन जिलाधिकारी को सोंपा !

कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित – शिक्षा संकल्प सभा में विभिन्न गावं से आई बच्चियों ने अपने अपने गावं की शिक्षा की समस्याओं को रखा, बबली रिनिया ने बताया कि उनके गावं के विद्यालय में आज भी वाल्मीकि समुदाय के बच्चों को अलग बिठाया जाता है,दलित रसोइया खाना नहीं बना सकते, वो सिर्फ झाड़ू पोंछा का काम करते है, बच्ची प्रिया,डोली,अनुराधा ने बताया कि उनके विद्यालय में लड़कियों के लिए अलग शौचालय नहीं है इससे उन्हें बहुत दिक्कत होती है,जो शौचालय बना भी है वो भी सही नहीं है,मंच के साथ अलग अलग गावं में शिक्षा के मुद्दे को लेकर कार्य करने बाले – रिहाना मंसूरी,नीलिमा,अनीता,राजेश्वरी व रीता देवी ने कहा कि स्कूल में आज भी दलित बच्चों के साथ छुआछूत व भेदभाव किया जाता है,विमलकुमार,राजकुमार,संजय वाल्मीकि ने कहा कि स्कूल में बनाई गई शिक्षा समितियां बिलकुल ही निष्क्रिय हैं उन्हें पता ही नहीं है कि वो समिति के सदस्य है या नहीं, हम लोगों ने गावं गावं में सर्वे किया जहा पता चलता है कि शिक्षा अशिकर कानून के लागू हुए 7 वर्ष से अधिक समय होने के बाद भी आज भी सही रूप में शिक्षा अधिकार कानून का अनुपालन नहीं हो रहा है ! इसलिए आज हम सबको मिलकर शिक्षा ब्यवस्था में सुधार के लिए प्रयास करने होंगे,माता साबित्रीबाई फुले व ज्योतिबाफुले ने उस ज़माने में शिक्षा के लिये अनूठे प्रयास किये थे जिन्हें आज हम भारत की प्रथम महिला शिक्षा के रूप में जानते है, इसलिए हम सबको भी संकल्प लेकर सबको शिक्षित करने का संकल्प लेना होगा ! इस दिशा में मंच प्रयास भी कर रहा है !
अलग अलग गावं में मंच के माध्यम से गावं के ड्रॉपआउट व स्कूल में भेदभाव के शिकार दलित बच्चों को गावं में ही 2 घंटे प्रतिदिन सामुदायिक शिक्षा केंद्र(जय भीम एजुकेशन सेंटर) के माध्यम से निशुल्क शिक्षा देने का कार्य करने बाले स्वैछिक शिक्षक – कल्पना आटा, प्रीती बीजापुर,पंचम रिनिया,रामसिंह चुर्खी,सुरेन्द्रपाल उरकरा,राजेश मंगरोल,सुरजीतचरसोनी,प्रीती काशीरामपुर,नूर मुहम्मद खड्गुई,अजीत दमरास,जितेन्द्र जयरामपुर,संगीता नाका,विमल दशहरी,दिव्या इटोरा ने कहा कि हम मंच के माध्यम से बाबा साहब डॉ. अम्बेडकर व माता सबित्रिबाई फुले/ज्योतिबाफुले से प्रेरणा व संकल्प लेकर अपने अपने गावं में प्रतिदिन 2 घंटे बच्चों को पढ़ने का कार्य करते है, है !
बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच के संयोजक- कुलदीप कुमार बौद्ध ने कहा कि कोई भी बदलाब तभी आएगा जब लोग शिक्षित होंगे,मंच द्वारा बुंदेलखंड में शिक्षा पर की गई स्टडी में चौकाने बाले तथ्य सामने आये है।आज भी शिक्षा का अधिकार कानून पूर्ण रूप से किर्यान्वित नहीं हो रहा व स्कूल में दलित बच्चो के साथ बिभिन्न स्तर पर जातिगत भेदभाव व छुआछूत होता है, फुले दंपत्ति ने उस समय किन परिस्थियों में शिक्षा के लिए संघर्ष करते हुए खासकर बच्चियों/महिलाओं की शिक्षा के लिए प्रयास किये थे, आज हम सबको वो जिम्मेदारी उठानी होगी और गावं गावं में साबित्री बाई फुले/ज्योतिबा फुले पैदा करने होंगे व बच्चों को शिक्षित करने की पहल करनी होगी,। मंच इस दिशा में प्रयास कर रहा है, अभी जिले के 15 गावं में समुदाय के सहयोग से सामुदायिक शिक्षा केंद्र(जय भीम एजुकेशन सेंटर) खोलें है जहाँ प्रतिदिन 750 से अधिक बच्चे पड़ते है इस वर्ष 100 से अधिक गावं में यह प्रयास किया जायेगा ! नंदकुमार-बहुजन फाउंडेशन,सीलेंद्र गौतम दमरास,दीपक वर्मा व मनोज कुमार-समता मूलक मंच ने शिक्षा के महत्व पर चर्चा की व सभी ने मंच के साथ मिलाकर शिक्षा व्यबस्था में सुधार व भेदभाव रहित गुणबत्ता पूर्ण शिक्षा के लिए ब्यापक आन्दोलन चलाने का संकल्प लिया ! इस दौरान- साथी संगठनों के लीडर- विमलकुमार बौद्ध,राजेश्वरी-साथी ग्रुप,धर्मपाल राजपूत,नीलिमा,शिवराम-बुंदेलखंड एक्शन ग्रुप, रामकुमार, किसुनकुमार प्रजापति,रीता,रिहाना-पहल ग्रुप,अनीता राज,संजय वाल्मीकि,राजकुमार जाटव,कल्पना बौद्ध बुंदेलखंड महिला अधिकार ग्रुप सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे !






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