
कोंच-उरई । यहां ब्लॉक परिसर में जारी श्रीमद्भागवत कथा के दौरान बुधवार को कथा व्यास शिवशंकरानंद सरस्वती ने परमात्मा के विभिन्न अवतारों की कथा का वर्णन बड़े ही सुरुचिपूर्ण ढंग से करते हुये श्रोताओं को मुग्ध कर दिया। उन्होंने कहा कि जब भी पृथ्वी पर अधर्म बढता है या भक्तों पर संकट आता है, तब परमात्मा अवतार धारण कर पृथ्वी और भक्तों के कष्टïों को हरते हैं। गजेन्द्र मोक्ष की कथा सुनाते हुये कहा कि जब प्राणिमात्र के सभी सगे संबंधी जब उसका साथ विपरीत परिस्थितियों में छोड़ देते हैं तब ईश्वर ही उनकी सहायता के लिये आते हैं।

विद्वान कथा प्रवक्ता ने परमात्मा के समय समय पर लिये गये अवतारों की कथायें सुना कर श्रोताओं को मुग्ध कर दिया। उन्होंने गजेन्द्र मोक्ष की कथा के माध्यम से यह बताने का प्रयास किया कि प्राणिमात्र को केवल परमात्मा पर ही विश्वास करना चाहिये, सांसारिक बंधन तो स्वार्थपूर्ण होते हैं। ग्राह ने जब गजेन्द्र को सरोवर में खींच लिया तो उस समय वहां उपस्थित गजेन्द्र के परिवार के किसी भी सदस्य ने उसकी सहायता नहीं कर पाई तब उसने करुणामय परमात्मा का स्मरण किया और भगवान ने एक पल की भी देर लगाये बिना वहां आकर गजेन्द्र को ग्राह के बंधन से मुक्त कराया। परीक्षित करनसिंह भदौरिया व उनकी पत्नी सरोजदेवी ने भागवतजी की आरती उतारी।






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