उरई। वाह-वाही के लिए जहां मांग हुई सरकार ने अस्पताल के नाम पर इमारतें खड़ी करवा दीं। जबकि डाक्टरों का इंतजाम आज तक नही हो पाया है। सफेद हाथी बने ऐसे सरकारी अस्पताल जनता के पैसे के सरकारी खजाने की बर्बादी की कहानी सुना रहे हैं।
सिरसाकलार की न्यू पीएचसी इसकी बानगी है। सिरसाकलार के रहने वाले आईएएस आरबी भास्कर मुलायम सिंह के नजदीकी थे। इसलिए पहली बार मुख्यमंत्री बनने पर उनकी गुहार पर मुलायम सिंह ने सिरसाकलार में न्यू पीएचसी मंजूर कर दी थी। 1989-90 में चार शैय्याओं के इस अस्पताल में दावा तो था गंभीर रोगियों को भर्ती करके उनके गहन उपचार का लेकिन हालत यह है कि अस्पताल में आज ओपीडी तक की सेवाएं ढंग से काम नही कर रही हैं।
इस अस्पताल में पिछले तीन सालों से कोई चिकित्सक की तैनाती नही हुई है। इसलिए अस्पताल का सारा जिम्मा फार्मासिस्ट योगेश कटियार के कंधों पर है। अस्पताल में प्रतिदिन 30 से 35 मरीज आते हैं और जहटौली, जखा, गिगौरा, पीपरी छानी सहित एक दर्जन गांव के लोग यहां इलाज के लिए पहुंचते हैं लेकिन उनके साथ केवल छलावा होता है। एलटी की भी तैनाती नही है जिससे खून की जांच नही हो पाती। जबकि आजकल बुखार, खांसी व निमोनियां का दौर चल रहा है। फार्मासिस्ट ने भी स्वीकार किया कि अस्पताल की लुंज-पुंज व्यवस्था के कारण क्षेत्र में झोला छाप डाक्टरों की चांदी हो रही है।






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