उरई। मायावती के कार्यकाल में गरीबों के लिए बसाई गई जन्नत बेहाल है। कांशीराम कालोनी में लोग नर्क से बदतर जिंदगी गुजारने को मजबूर हो रहे हैं।
कभी इस कालौनी के लिए अधिकारी सिर के बल खड़े रहते थे। कालोनी की एहमियत सरकारी अमले के लिए किसी तीर्थ से कम नही थी। आये दिन अधिकारी और कर्मचारी कालोनी के रखरखाव के लिए आते रहते थे।
लेकिन अब इस कालोनी से जिम्मेदारों ने आंखें फेर ली हैं। गजेंद्र कुमार, गोलू ठाकुर, लला, छोटे चैधरी, पिंटू चैधरी आदि बाशिंदों ने दिखाया कि किस तरह कालोनी में पानी की लाइन बस्र्ट होने से जल भराव और दलदल हो रहा है। सीवर लाइन भी टूटफूट चुकी है और घरोें के अंदर शौचालय जाम हैं।
कालोनी का पार्क भी उजाड़ हो चुका है। उसमें अन्ना जानवरों का डेरा रहता है। बच्चे पार्क में ही शौच कर जाते हैं।
शहर में सबसे ज्यादा लाइट कांशीराम कालोनी में गुल रहती है। शाम 6 बजे लाइट चली जाती है इसके बाद रात 12 बजे आती है। दिन में भी बिजली की आंख मिचैली जारी रहती है।
ब्लाक नं. 105 के बाशिंदे मुन्ना अंसारी पूंछते हैं कि क्या गरीबों में सरकार मेरे तेरे का बटवारा करती है। ऐसा न होता तो दूसरी सरकार द्वारा बसाई होने की वजह से इस गरीब कालोनी के बाशिंदों से अब गैरों जैसा व्यवहार क्यों होता।

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