उरई। शहर की शान माने जाने वाले माहिल तालाब में गिर रहे निजी शौचालय बंद कराने की हिम्मत प्रशासन नही दिखा पा रहा। जबकि इसके सौन्दर्यीकरण पर करोड़ों रुपये खर्च हो चुके हैं।
एतिहासिक माहिल तालाब को चंदेल कालीन माना जाता है। सन 2001 में जन सहभागिता से श्रमदान कर इस तालाब के पुनरूद्धार की पहल की गई थी। इसके बाद सरकार और प्रशासन भी आगे आया और अंततोगत्वा यह विशाल तालाब फिर प्राचीन काल जैसी भव्यता के साथ बहाल हो गया।
ल्ेकिन तालाब के अस्तित्व को लेकर चुनौतियां अभी खत्म नही हुई हैं। जिसमें सबसे बड़ी चुनौती है तालाब की स्वच्छता बनाये रखने की। पांच वर्ष से अधिक समय से तालाब के किनारे बने जिन घरों के शौचालय की गंदगी इसमें डाली जा रही है उन पर गौर किया जा रहा है। अधिकारियों ने हमेशा कहा कि लोग स्वेच्छा से अपने शौचालय की निकासी तालाब में बंद कर दें अन्यथा कार्रवाई होगी। लेकिन न तो गंदगी की निकासी बंद हुई और न ही किस पर कार्रवाई हुई।
इन दिनों तालाब को खाली करके ताजे पानी से भरने की कवायद चल रही है। लेकिन तालाब में गंदगी का ढेर और शौचलयों की निकासी इस कवायद पर पानी फेरने वाली है। जिसे संज्ञान में लेने को प्रशासन तैयार नही है। तालाब के खाली होने के बाद पूजा सामग्री व घरों की गंदगी के ढेर जहां तहां तालाब में उभर आये हैं। उधर शौचालयों की निकासी ने तालाब में पानी न रह जाने के बाद बदबू में भारी इजाफा कर दिया है। लोग इस पर गहरी निराशा जता रहे हैं और शहर के गौरव की सलामती के लिए कुछ न करने को लेकर नगर पालिका और प्रशासन को कोसते नजर आ रहे हैं।







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