कोंच-उरई । अबकी दफा गर्मी में कस्बाई बाशिंदों को भीषण पेयजल संकट से जूझना पड़ सकता है। इसका बड़ा कारण यह है कि जल संस्थान की उदासीनता और रखरखाव के अभाव में तकरीबन सैकड़ा भर हैंडपंप रीबोर के लिये लंबित पड़े होने की फेहरिश्त में हैं और कमोवेश इतने ही छोटी मोटी कमी के कारण दम तोड़े पड़े हैं। जल संस्थान का जबाब बहुत ही चौंकाने बाला है, जब इनके पास शिकायत आती है तभी इनका स्टाफ उक्त हैंडपंप को देखने जाता है। जबकि होना तो यह चाहिये कि जल संस्थान को स्वयं ही खराब हैंडपंपों की तलाश करके सूचीबद्घ किया जाना चाहिये और क्रमबद्घ तरीके से उनकी रिपेयरिंग हो जानी चाहिये। संस्थान के पास 4500 लिटर की क्षमता बाला एक वाटर टैंकर तो है लेकिन उसको लाने ले जाने के लिये ट्रैक्टर या अन्य कोई साधन नहीं होने के कारण यह महज सफेद हाथी की तरह अपनी उपस्थिति भर दर्शा रहा है।

 

 

हालांकि अभी जनवरी का ही महीना चल रहा है लेकिन तापमान में इतनी गर्मी अभी से है कि लोगों ने अपने स्वेटर या अन्य गर्म कपड़ों का उपयोग कम कर दिया है। यह तापमान इस बात का संकेत है कि अबकी दफा गर्मी लोगों को झुलसायेगी। ऐसी स्थिति में कस्बे बासियों को पीने के पानी की भारी किल्लत से दो चार होना पड़ सकता है। इसका ठोस कारण तो यही है कि कस्बे में स्थापित कुल 547 हैंडपंपों में से दो सैकड़ा हैंडपंप अपना दम तोड़ चुके हैं। इनके बंद पड़े होने के भी कई कारण हैं, अव्वल तो एक सैकड़ा हैंडपंप रीबोर की सूची में अपनी पुर्नस्थापना की बाट जोह रहे हैं जबकि लगभग इतने ही हैंडपंप छोटी मोटी खराबियों के कारण पानी देने से इंकार कर रहे हैं। तहसील परिसर में अधिकारियों की नाक के नीचे बंदीगृह के पीछे का हैंडपंप महीनों से खराब पड़ा है लेकिन इसका पुरसा हाल पूछने बाला कोई नहीं है। कैलिया बस स्टैंड, सहकारी क्रय विक्रय समिति, भगतसिंह नगर, मानिक चौक आदि स्थानों के हैंडपंप भी ठूंठ की तरह खड़े व्यवस्था को मुंह चिढा रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक पूरे पालिका क्षेत्र के पच्चीसों वार्डों में हैंडपंपों की स्थिति काफी खराब है। ऐसे में नागरिकों का क्या हाल होने बाला है, यह तो आने बाली गर्मी ही बतायेगी। गौरतलब यह भी है कि जल संस्थान की पाइप लाइन से होने बाली वाटर सप्लाई के लिये कुल नौ नलकूप स्थापित हैं लेकिन एकाध नलकूप को छोड़ दें जहां सीवर लाइनें नहीं हैं तो इनका पानी पीने योग्य बिल्कुल भी नहीं है क्योंकि इनमें सीवर की गंदगी मिला पानी आता है जिसका उपयोग नागरिक अन्य कामों में करते हैं जबकि पीने के लिये नागरिक इन्हीं हैंडपंपों पर अपनी निर्भरता बनाये हैं।

 

Leave a comment