उरई। जिला अस्पताल में सरकारी डाक्टर हरकतों से बाज नही आ रहे। हर मर्ज की पर्याप्त दवाएं जिला अस्पताल में मौजूद हैं। फिर भी डाक्टर बाहर की दवाएं कमीशन के लोभ में लिखने से बाज नही आते।
सरकार व जिले के उच्चाधिकारी बार-बार सरकारी डाक्टरों को हिदायत देते है कि वे जिला अस्पताल आने वाले मरीजो को बाहरी दवाएं न लिखें। तांकि उनके निःशुल्क इलाज का दावा चरितार्थ रह सके। पर डाक्टर इससे बाज आने को तैयार नही हैं।
जालौन टाइम्स की टीम ने शनिवार को जिला अस्पताल का दौरा किया तो अमर सिंह नाम के एक मरीज के हाथ में पीले रंग की पर्ची दिखाई पड़ी जिसमें डाक्टर ने बाहर की दवा लिख रखी थी। अमर सिंह ने बताया कि डाक्टर ने उनसे कहा कि अस्पताल की दवा से कोई राहत मिलने वाली नही है। अगर मर्ज में आराम चाहते हो तो बाहर से उस दवा को खरीद लो जिसे वे पीली पर्ची पर लिख रहे हैं।
बताया जाता है कि मेडिकल स्टोर के लिए डाक्टर जो दवाएं लिखते हैं उनमें कई गुना एमआरपी अंकित रहती है जबकि वास्तविक कीमत बहुत कम होती है। मरीज को एमआरपी मूूल्य देने के लिए बाध्य किया जाता है। बाद में पर्चियों के आधार पर डाक्टर और मडिकल स्टोर संचालक के बीच मुनाफे की बंदर बाट होती हैं।
अस्पताल में अंदर की व्यवस्थाओं का भी पुरसाहाल नही है। जो नल लगे हैं उनमें पानी नही आता। जिससे मरीजों और तीमारदारों को पानी के लिए भटकना पड़ता है। वासबेसिन भी पानी न आने के कारण शोपीस बनकर रह गये हैं। जिला अस्पताल के पार्क में रैन बसेरा बना दिया गया है। घटिया निर्माण के कारण इसकी दीवारों से पुटीन को उखड़ते साफ देखा जा सकता है। खुद ही बीमार नजर आ रहे जिला अस्पताल में सार्थक उपचार की उम्मीदें इसीलिए लोगों में घर नही कर पा रहीं।






Leave a comment