उरई। खामोशी के साथ ग्राहकों की साइकिल का पंचार सुधार रहा यह शख्स गांव का प्रधान है। लेकिन उन्हें अपना मुख्य कार्य करते हुए शान में किसी तरह की गुस्ताखी महसूस नही हो रही।
महेवा विकास खंड की लौना ग्राम पंचायत के तत्कालीन प्रधान को अपहरण के एक मामले में अदालत ने सजा सुना दी थी। जिसके बाद उन्हें बर्खास्त करके प्रधान पद रिक्त घोषित कर दिया गया। इसलिए ग्राम पंचायत के संचालन के लिए तीन सदस्यीय समिति के गठन का प्रस्ताव था। लेकिन जिला मजिस्ट्रेट ने फैसला किया कि वे समिति बनाने की बजाय उस एक वार्ड मैंबर को पूरा चार्ज सौंपेगें जो सबसे ज्यादा पढ़ा लिखा होगा। इस क्राइटेरिया में साइकिल का पंचर सुधारने वाले कृष्ण प्रसाद का नाम सबसे ऊपर आया जो बीए तक पढ़े लिखे हैं।
जन प्रतिनिधि बनने के बाद लोग अकड़ से तन जाते हैं लेकिन कृष्ण प्रसाद की सादगी में प्रधानी के ग्लेमर का तड़का लगने से रहा। वे आज भी बदस्तूर साइकिल के पंचर सुधारने की दुकान चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि जन प्रतिनिधि होना एक सामाजिक और सेवा का दायित्व है इसलिए प्रधान बनने से कुछ अतरिक्त हो जाने का क्या मतलब है। पंचायत का कोई काम आता है तो उसे फर्ज और सेवा समझकर कर देता हूं लेकिन पंचर की दुकान से जो नाता है वह तो जीविका से जुड़ी होने के कारण अटूट है।






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