0 आरओ ने कार्यवाही के लिए जिलाधिकारी को लिखा पत्र

0 जिलाधिकारी ने तीन सदस्यीय टीम गठित की

0 एट में १३ पर्चे किए निरस्त, कैलिया और कुसमिलिया में भी आपत्तियों पर विवाद

उरई । कोआपरेटिव चुनाव में जो आपत्तियां लगाई जानी थी वह समय से लगाई गई, परंतु आपत्तियों का निस्तारण न करते हुए चुनाव निर्वाचन अधिकारियों ने अपनी मनमानी की और किसी की एक न सुनीं। ऐसे में कई लोगो ने अपनी शिकायतें दर्ज कराई और शिकायतें सही पाए जाने पर आरओ ने कार्यवाही के लिए जिलाधिकारी को पत्र लिखा। मामला अति गंभीर समझते हुए जिलाधिकारी ने ३ सदस्यीय टीम गठित की।

कैलिया, कुसमिलिया, एट आदि जगह संचालक पद के लिए चुनाव हो रहें है और जिसमें २२ जनवरी आपत्ति लगाने की तिथि निर्धारित की गई थी। कैलिया में नंदकिशोर पुत्र जुगलकिशोर ने आरोप लगाया कि राघव पुत्र शिवपाल ने फर्जी हस्ताक्षर करके हमारा नाम प्रस्ताव में डाल दिया था। नंदकिशोर ने कैलिया के चुनाव निर्वाचन अधिकारी, ग्राम विकास अधिकारी मजबूत सिंह निरंजन को वास्तविकता बताई और एफीडेविट दिया, परंतु मजबूरत सिंह निरंजन ने उनकी एक न सुनी और उन्होंने राघव के नाम का पर्चा बहाल कर दिया। यह बहाली सुनते ही दूसरे प्रतिद्वंद्वी अटल बिहारी के समर्थक सोसाइटी में आ धमके और मामला गर्मागर्मी पर हो गया। फिर भी मजबूत ंिसंह ने अपनी वहीं बात दोहराई कि प्रस्तावक के हस्ताक्षर असली है। सवाल यह उठता है कि जब प्रस्तावक एफीडेविट देकर कह रहा कि हमारे हस्ताक्षर फर्जी किए गए है तो मजबूत सिंह ने किस आधार पर नहीं माना। वहीं एट में चुनाव निर्वाचन अधिकारी डकोर ब्लाक के जेई विजय बहादुर सिंह ने संचालक पद के १३ पर्चे निरस्त कर दिए। इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि जो पत्र दिए गए उसमें संबोधन मेरे नाम का नहीं है। यह सब मामलें आरओ के पास पहुंचें। आरओ ने अपनी टीका टिप्पणी करते हुए फाइल को जिलाधिकारी के पाले में डाल दिया। जिलाधिकरी ने आनन-फानन में ३ सदस्यीय टीम गठित कर दी। जिसमें अपर जिलाधिकारी राकेश सिंह, एआर कोआपरेटिव प्रेमचंद्र एवं अतिरिक्त मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में सारे कागजों की जांच होगी और उसी आधार पर निर्णय लिया जायेंगा। जानकारी के मुताबिक सुबह पांच बजे तक अधिकारी इन मामलों की जांच करते रहे और जांच के उपरांत उन्होंने जिलाधिकारी के पास अपनी जांच आख्या भेज दी। समाचार लिखे जाने तक जिलाधिकारी द्वारा कोई भी प्रतिक्रिया नहीं व्यक्त की गई। चूंकि कोआपरेटिव चुनाव गांव क्षेत्र से जुडें हुए है इसलिए इस चुनाव का महत्व ग्रामीण क्षेत्र में ज्यादा है और चुनाव भी आन-बान-शान के बन गए है इसलिए कोई भी अपनी शान में समझौता करना उचित नहीं समझता है।

 

 

 

 

 

 

 

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