माधौगढ़ (उरई )। चाहे केंद्र की सत्ता का बदले या फिर प्रदेश सरकार का लेकिन सड़क निर्माण का जो सिस्टम पूर्व से चला आ रहा है वही रहता है। फिर सड़क का निर्माण लाखों रुपये की लागत से या फिर करोड़ों रुपये की लागत से इससे ठेकेदारों को कोई मतलब नहीं रहता है। कार्यदायी संस्थाओं को केवल कार्य पूर्ण होने के बाद अपने फुल भुगतान की चिंता सताती है। जिसे वह हर हाल में हासिल कर लेते हैं। यही क्रम जनपद ही नहीं बल्कि समूचे प्रदेश में बदस्तूर चल रहा है।

ऐसा ही हाल बंगरा से रूरा तक हाल ही में लोक निर्माण विभाग द्वारा लाखों रुपये के बजट से बनवायी थी। ताकि क्षेत्रीय राहगीरों की यात्रा सुखद हो सके। लेकिन हैरत की बात तो यह है कि उक्त लाखों से निर्मित सड़क बनने के चंद दिनों बाद ही उखड़ने का क्रम शुरू हो गया और आज भी निरंतर जारी हैं इस संबंध में जब क्षेत्रीय लोगों ने मामले की शिकायत संबंधित विभाग से की तो उन्होंने भी ऐसी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया। अब क्षेत्रीय लोगों में इस बात को लेकर आक्रोश गहराने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने सड़क निर्माण के दौरान इस बात का विरोध किया था कि सड़क निर्माण में ठेकेदार मानकों को अनदेखा कर रहा हैं लेकिन उस दौरान हमारी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया जिसका खामियाजा आज हम लोग भुगतने को विवश हो रहे हैं। अब देखना यह होगा कि क्या लोक निर्माण विभाग के जिम्मेदार अधिकारी व हमारे जनपद के ईमानदार बने जनप्रतिनिधि इस ओर ध्यान देते हैं या नहीं यह तो समय ही बतायेगा।

 

 

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