उरई। कलम के सच्चे सिपाही सुदर्शन सिंह जादौन की लेखनी में लोक कल्याण की भावना निहित रही है। उनके द्वारा लिखित यात्रा वृतान्त एवं संस्मरण सदैव लोगों के लिए प्ररेणादायक रहेगे। उक्त विचार बसंत पंचमी के पावन अवसर पर इग्नू अध्ययन केन्द्र उरई के सभागार में बुंदेलखंड महापरिषद के तत्वावधान में आयोजित बुंदेलखंड महापरिषद के संस्थापक सुदर्शन सिंह जादौन के जीवन चरित्र पर आयोजित विचार गोष्ठी में व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि बाबूजी के नाम से विख्यात कर्म के तपोनिधि विश्वास और भरोसे के पुरोधा सुदर्शन सिंह को कर्मचारियों एवं शिक्षकों हितों के लिए थकना मानो उनके शब्दकोश में नही था। उनके द्वारा दी गई सीख सबके लिए मददगार साबित होती थी। महापरिषद के उपाध्यक्ष शिवशंकर अवस्थी ने उनके जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्ष 1986 में कलेक्टेªट उरई से प्रशासनिक अधिकारी के पद से सेवानिवृत होने के उपरांत वह कर्मचारियों के हितों के लिए सदैव संघर्षशील रहे। पुस्तकों के पठन पाठक में गहरी रूचि के कारण वह अपने इष्ट मित्रों को धार्मिक एवं समाजिक पुस्तके भंेट किया करते थे। संघर्ष के सच्चे राही सुदर्शन के बारे में डा. श्रीप्रकाश अग्रवाल, अजय सिंह यादव, शिवसिंह चैहान, अजय महतेले,रविन्द्र सिंह परमार, ब्रजबिहारी गुप्ता, कुंदनसिंह राठौर, श्यामकरन हेमंत सिंह यादव, लक्ष्मीप्रसाद राजपूत ने उनके द्वारा समाजहित में किए गए कार्यो की सराहना करते हुए कहा कि उनके जीवन में सच्चाई ऐसी थी कि सागर भी उनके सामने उथला सा प्रतीत होता था। उनके द्वारा लिखित साहित्य का शीघ्र प्रकाशन किया जाएगा। गोष्ठी का संचालन बुंदेलखंड परिषद के सचिव शंकरदयाल मिश्रा ने किया।






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