
उरई। तुम हमें खून दो, हम तुम्हें आजादी देगें का उदघोष करने वाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती मंगलवार को देश भक्ति से ओतप्रोत माहौल में मनाई गई। लोक निर्माण विभाग परिसर के पास नेताजी की प्रतिमा के सामने आयोजित सभा में वक्ताओं ने कहा कि हमारी आजादी असली तौर पर नेताजी के साहस और कौशल की देन है। उन्हें अगर आजादी के बाद देश चलाने का मौका मिलता तो भ्रष्टाचार जैसी कुरीतियां कभी नही पनप पाती और यह देश कभी का चीन, अमेरिका से भी आगे निकल चुका होता।

कार्यक्रम की अध्यक्षता नगर पालिकाध्यक्ष अनिल बहुगुणा ने की। उन्होंने कहा कि नेताजी ने ही सबसे पहले गांधी जी को राष्ट्रपिता का संबोधन दिया। उन्होंने आजादी के लिए सैन्य तरीका अपनाया था। लेकिन इसके बावजूद वे अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी का सबसे ज्यादा आदर करते थे। युद्धवीर कंथरिया ने नेताजी को पराक्रमी महापुरुष बताया। जिला बार संघ के पूर्व अध्यक्ष प्रद्युम्न कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि नेताजी की आजाद हिंद फौज से भयभीत होकर ही अंग्रेज देश छोड़ने के लिए मजबूर हुए थे। हौम्योपैथी चिकित्सक डा. विवेक सक्सेना ने याद दिलाया कि नेताजी ने आईसीएस में सिलेक्ट हो जाने के बाद भी नौकरी करके उनकी गुलामी को मंजूर करना पंसद नही किया था। पूर्व सभासद लक्ष्मण दास बाबानी, सभासद अनुराग दाऊ, जयशंकर द्विवेदी, डा. ममता स्वर्णकार आदि ने भी अपने विचार प्रकट किये।
उधर बुंदेलखंड यूथ फ्रंट गरम दल के तत्वावधान में भी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर मनायी गई। गमर दल के जिलाध्यक्ष यतेंद्र प्रताप ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस स्वाधीनता संग्राम के अद्वितीय योद्धा थे। गरम दल के संयोजक अतुल कुमार ने कहा कि उन्होंने जर्मनी और जापान से दोस्ती कर अंग्रेज हुकूमत को इंटरनेशनल मंच से सामरिक चुनौती दी और भारतीय जतना के बीच संदेश पहुंचाने के लिए सिंगापुर में अलग से रेडियो स्टेशन स्थापित किया। उपाध्यक्ष एस. सेंगर ने कहा कि देश में गूंजने वाला लोकप्रिय नारा जयहिंद नेताजी की ही देन है। गोपाल तिवारी, बुजुर्ग समाजसेवी सत्यपाल शर्मा आदि ने भी नेताजी के जीवन पर प्रकाश डाला।






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