उरई। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने उन प्रतिद्वंदी शिक्षक संगठनों के कृत्य की निंदा की है जो विभाग के भ्रष्ट अफसरों को अपना उल्लू सीधा करने के लिए बचाने में मशगूल हैं। महासंघ ने शिक्षकों से अनुरोध किया कि वह चालबाज नेताओं के दुष्प्रचार से सचेत रहें और सच्चाई की राह न छोड़ें।
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की जिला इकाई के अध्यक्ष राजेंद्र राजपूत, संरक्षक प्रकाश नारायण पाठक, जिला प्रभारी अरविंद नगायच, संघर्ष समिति के अध्यक्ष इलियास मंसूरी, कार्यवाहक महामंत्री अरुण पांचाल, जिला महामंत्री प्रदीप सिंह चैहान और कोषाध्यक्ष अशोक तिवारी ने संयुक्त रूप से अवगत कराया है कि महासंघ ने जालौन के खंड शिक्षाधिकारी विनोद गौतम के काले कारनामों की शिकायत जिलाधिकारी से की थी। जिसमें उन पर 40 लाख रुपये की धनराशि हड़प जाने का आरोप साबित होता था। जिलाधिकारी ने इसकी जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की। 24 जनवरी को बीआरसी भिटारा में जांच तय की गई थी। लेकिन तीन में से दो सदस्य राज्य स्थापना दिवस समारोह में व्यस्तता की वजह से नही आ सके।
अतिरिक्त मजिस्ट्रेट प्रदीप कुमार ने तय समय पर सुनवाई की। इस दौरान जो साक्ष्य उपलब्ध कराये गये उनसे खंड शिक्षाधिकारी की शिक्षकों के समक्ष कलई खुल गई। इस दौरान एक संगठन के कतिपय पदाधिकारी जो खंड शिक्षाधिकारी द्वारा शिक्षकों के शोषण में सहभागिता करते रहे थे। वह उनको बचाने में जोरशोर से लग गये।
उन्होंने कहा कि खंड शिक्षाधिकारी ने विद्यालयों में पहुंचकर पूरा दबाव शिक्षकों पर बनाया था कि वे उनके खिलाफ शिकायतें वापस ले लें लेकिन महासंघ के संबल के कारण उनके सारे प्रयास चकनाचूर हो गये। उन्होंने शिक्षक साथियों से अन्याय के खिलाफ डटे रहने की अपील की।

 

Leave a comment