उरई। बेसिक शिक्षा विभाग में ऊपर से नीचे तक के अधिकारी घर बैठे वेतन लेने की छूट शिक्षकों को दिये हुए हैं। जिससे नौनिहालों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है।

आम जनता के बच्चे अभी भी बहुतायत में परिषदीय विद्यालयों में ही पढ़ते हैं। इसलिए इन विद्यालयों को कांवेंट से बेहतर तरीके से संचालित करने के लिए सरकार द्वारा भारी भरकम बजट खर्च किया जा रहा है। जिसमें कांवेंट स्कूल के शिक्षकों की तुलना में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों का कई गुना वेतन भी शामिल है। लेकिन स्कूलों में शिक्षक पहुंचते ही नही हैं। उन्होंने बेसिक शिक्षा के अधिकारियों को महीना बांधकर इसकी छूट ले ली है। कई विद्यालयों में तो इसके कारण ताला लटका रहता है। लेकिन जिले में कोई सुचारू मानीटरिंग न होने से किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नही हो पा रही।

जालौन टाइम्स ने रामपुरा ब्लाक में इसे लेकर एक सर्वे किया तो उन शिक्षकों की एक पूरी फेहरिस्त सामने आ गई जो कभी स्कूल जाते ही नही हैं। लेकिन जिनकों बराबर वेतन मिल रहा है।

यह सूची इस प्रकार है। संगीता गुप्ता तैनाती जमालपुरा संबंद्ध भटपुरा, स्मृति त्रिपाठी प्राथमिक विद्यालय जायघा, रंजीता सिंह प्राथमिक विद्यालय जसुआपुर, कोमल सिंह प्राथमिक विद्यालय हनुमान गढ़ी, काजल चैधरी और प्रतिभा प्राथमिक विद्यालय अंगदेला की मड़ैया, सरला सिंह प्राथमिक विद्यालय मोहम्मदपुरा, सविता प्राथमिक विद्यालय कंजौसा, रामजी पाण्डेय उच्च प्राथमिक विद्यालय रामपुरा, मंगल सिंह प्राथमिक विद्यालय टीहर संबंद्ध बीएसए कार्यालय, रश्मि मिश्रा कन्या प्राथमिक विद्यालय टीहर और विनोद कुमार व महेश प्रताप प्राथमिक विद्यालय जाजेपुरा।

 

 

 

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