उरई (जालौन)। रविवार को प्रभारी जिला पंचायत राज अधिकारी राजबहादुर अपने विभागीय कुछ कर्मियों के साथ डकोर विकास खंड के ग्राम नुनसाई में शिकायतों की हकीकत को आंखों से देखने व की गयी शिकायतों की सच्चाई जानने पहुंचे थे। लेकिन उन्होंने न तो एक भी शिकायत को गंभीरता से लिया और न ही उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना में लाभ लेने वाले अपात्र लोगों की सच्चाई देखी। अब ग्रामीणों के बीच में इस बात की चर्चा चल रही है फिर डीपीआरओ क्या प्रधान के आवास पर नाश्ता करने आये थे।
गौरतलब हो कि जब से ग्राम प्रधान श्रीमती नारायनी देवी निर्वाचित हुयी है तभी से उनके पति जो हिन्दुस्तान लीवर में कार्यरत है वह अपने तरीके से प्रधानी का कामकाज देख रहे हैं। उनके द्वारा गांव के ही केसदरदास पुत्र रामचरन को दूसरी बार आवास योजना का लाभ दिलाया। जबकि उन्होंने पहले मिले आवास का निर्माण भी पूरा नहीं कराया था उसी बुनियाद पर पुनः आवास का निर्माण कराया जा रहा है। इसी श्रेणी में गांव के आधा दर्जन ऐसे लोग शामिल हैं जो अपात्र होने के बाद भी उन्हें पीएम आवास योजना का लाभ दिला दिया। जबकि गांव के ही रामपाल पुत्र रामेश्वर को पात्र होने के बाद भी आवास योजना का लाभ नहीं दिया। इसीक्रम में शिकायतों के क्रम में देखें तो तिजई के आवास से लालाराम के मकान तक जो इंटरलाकिंग डाली गयी वह खडं़जा पर डस्क डालकर बिछायी गयी। इसी प्रकार से मतोले के आवास से लोटनराम के आवास तक, कामेश्वर के आवास से गंतव्य तक भी बेमानक इंटरलाकिंग डलवायी गयी। उक्त सड़कों का स्थलीय निरीक्षण करना भी प्रभारी डीपीआरओ ने जरूरी नहीं समझा। ताज्जुब की बात तो यह है कई मामलों की शिकायत जयनारायण ने की थी लेकिन डीपीआरओ ने उन्हें न बुलाकर उनके अनपढ़ भाई को बुलाकर प्रधान द्वारा शौचालय निर्माण के नाम पर वसूली गयी एक हजार रुपये की सुविधा शुल्क को वापस कराया जो भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा ही कही जायेगी। जबकि प्रभारी डीपीआरओ ने बृजबिहारी पुत्र जगन्नाथ द्वारा की गयी शिकायत का कोई संज्ञान ही नहीं लिया।








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