जालौन। केंद्र व प्रदेश सरकार प्राइमरी शिक्षा के लिए करोड़ों, अरबों रुपयों का बजट प्रतिवर्ष खर्च करती है। इसके बावजूद प्राथमिक शिक्षा हाशिए पर है। न तो कोई सुविधाएं मिलती हैं और न ही बच्चों को उचित शिक्षा। अध्यापकों को पर्याप्त वेतन और जनप्रतिनिधियों को उचित कमीशन। जी हां, ये सच है। शिक्षा के नाम पर बच्चे सरकारी स्कूल में जाकर प्रमाण पत्र तो पाते हैं, मगर शिक्षा नहीं। प्रदेश के जनपद जालौन में कालपी विधायक ने खुद एक प्राइमरी विद्यालय का निरीक्षण किया। विधायक जी रजिस्टर देखते रहे, और उनके पीछे मासूम बच्चे जमीन पर बैठे अपना बस्ता खोलकर किताबें पलटते रहे। उनके बैठने के लिए फर्श भी नहीं था स्कूल में। विधायक जी को देख उनके लिए तो शिक्षकों ने कुर्सी डाल दी और स्वयं सेवक की तरह हाथ जोडक़र खड़े हो गए। विधायक ने भी कुर्सी संभाल ली, मगर बच्चों को जमीन पर बैठाए जाने का कारण तक नहीं पूछा। ऐसे में क्या उम्मीद की जाए सरकारी तंत्र और जनप्रतिनिधियों से?

कालपी से भारतीय जनता पार्टी से चुने गए विधायक नरेंद्र सिंह जादौन आज ग्राम बबीना में स्थित प्राथमिक विद्यालय में निरीक्षण करने पहुंच गए। विद्यालय में केवल 9 छात्र उपस्थित मिले। शिक्षा मित्र प्रभुदयाल ही उपस्थित थे। अन्य सभी नदारद थे। विद्यालय का उपस्थिति रजिस्टर भी गायब था। पास बने बालिका विद्यालय में भी उपस्थिति संतोष जनक नहीं थी। इसके बाद विधायक जी वहीं बने जूनियर हाईस्कल में पहुंच गए। वहां भी कुल 2 छात्र ही उपस्थित मिले। प्रधानाध्यापिका खुद अनुपस्थित थीं। यह केवल एक गांव के विद्यालय की तस्वीर थी। ऐसी ही तस्वीर प्रत्येक सरकारी विद्यालय की है। जहां अधिकारी/जनप्रतिनिधि निरीक्षण में सबकुछ ओके लिख देते हैं, मगर ओके कुछ नहीं मिलता।

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