उरई(जालौन)। अचानक मौसम के रूख बदलने से किसानों की चिंताएं बढ़ने लगी है। बढ़ी मेहनत के साथ किसानोें ने अपनी फसलों को आवारा जानवरों से बचाने के लिए कड़कड़ाती हुई सर्दी में राते गुजारी। फसल की हरितमा को देखकर किसानों के चेहरों पर कुछ खुशियां झलकी थी। लेकिन अचानक मौसम के बदलते मिजाज ने फिर उन्हें चिंतित होने के लिए मजबूर कर दिया।
   किसानों की लहलहाती हुई फसले मटर, चना, मसूर, सरसों व गेहूं आदि खेतों में हरी भरी दिख रही है। जिसे बचाने के लिए किसान अपनी जान की बाजी लगा रहे है वहीं मौसम ने अपना रूख बदल लिया है अगर कहीं बेमौसम बारिश होती है तो किसानों की लहलहाती हुई फसलों का नुकसान हो सकता है। यहीं चिंता किसानों को सताने लगी है। वैसे भी विगत कई वर्षो से किसान सूखा, दैवीय आपदा जैसी अनहोनी घटनाएं को झेलता आ रहा है। किसानों ने आवारा जानवरों से फसल बचाने के लिए लाखों रुपये तार फैसिंग व कीटनाशक दवाओं में खर्च कर दिए है। कि उन्हें अच्छी उपज प्राप्त हो और विगत सालों से हो रहे नुकसान की भरपाई की जा सके। वैसे भी कई गांवों में गरीब तबके के किसानों ने जिनके पास तार फैसिंग या खाद बीज के लिए पैसे नही है। ऐसे किसान जनपद हजारों की तादाद में जिन्होंने हजारों हेक्टयेर जमीन पर अन्ना पशुओं के भय से या पानी के अभाव से खाली छोड़ दी है। केवल अपने गुजर बसर के लिए एक दो बीघे में फसल बोई है। यदि मौसम का रूख कहीं गड़बड़ होता है तो उन किसानों पर सीधा-सीधा बज्रपात से कम नही होगा। गरीब तबके का किसान ही सरकार की मार झेल रहा है उसे ही कुदर की मार का डर है। भले ही सरकार ने कई किसानों के कर्ज माफ किए हो लेकिन इन्ही गरीब किसानों को न तो सरकार की योजनाओं का लाभ न ही अपने खेतों में फसल उगाने की क्षमता ऐसी परिस्थिति मेें मौसम के बिगड़े मिजाज से किसान बुरी तरह से दहशत में है। 

Leave a comment