उरई(जालौन)। शहर में दमा रोग के मरीजों में निरन्तर इजाफा हो रहा है लेकिन इस रोग को लेकर आज भी उतनी ही भ्रांतियां है जितने सालों पहले थी। आज भी लोग चिकित्सकों के पास पहुंचने की बजाय देशी इलाज करने में ज्यादा विश्वास रखते है इस दमा रोग के बढने के पीछे एक सबसे बडा कारण अब प्रदूषण भी माना जाता रहा है। दमा के मरीजों में पिछलें कुछ सालों में इजाफा हुआ है इसका कारण बढता प्रदूषण भी है। नगर में तेजी से प्रदूषण फैल रहा है। जिस बजह से दमा के मरीजों में अटैक के कैसेज बढ गये है चिकित्सकों का कहना है कि इस रोग को लेकर लोेगों में जागरूकता तो आयी है लेकिन अभी भ्रंातियां दूर नहीं हुयी है। आज भी लोग चिकित्सकों की बजाय मछली वाली दवा खाने के लिये दूर-दूर चले जाते है जबकि इससे फायदा नहीं होता है। इस बारे में दमा रोग चिकित्सकों के अनुसार जनसंख्या में तीन से पांच प्रतिशत व्यस्कों को यह रोग होता है जबकि 10 से 14 प्रतिशत बच्चे इसकी चपेट में होते है बढते प्रभूषण के कारण लोगों ने अस्थमा के अटैक ज्यादा होने लगे है। बच्चों में दमा रोग अपने आप ठीक हो जाता है जबकि व्यस्कों में यह रोग ठीक नहीं होता है जिला अस्पताल और मेडीकल कॉलेज के ओपीडी विभाग आने वाले मरीजों में लगभग 15 प्रतिशत दमा रोग से पीडित इलाज के लिये आते है।







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