उरई। नगर पालिकाध्यक्ष अनिल बहुगुणा को भाजपा के दरवाजे खुलने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
स्थानीय निकाय चुनाव के समय भाजपा प्रत्याशियों की दौड़ में उरई नगर पालिका से अनिल बहुगुणा का नाम सबसे आगे चल रहा था। इसलिए उन्होंने पार्टी की आधिकारिक घोषणा के पहले ही अपनी तैयारियों में पूरी ताकत लगा दी थी।

लेकिन आखिरी मौके पर कुछ ऐसे समीकरण बने जिससे पार्टी ने अनिल बहुगुणा के नाम को छोड़ दिया। दूसरी ओर उनकी जीत के लिए पूरी तरह मन बना चुके भाजपा के वोट बैंक को यह गंवारा नही था कि वे अब पीछे हटने का फैसला करें। लोगों के भारी दबाव के बाद अनिल बहुगुणा ने स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में जोर आजमाइश का फैसला किया।
इस कोशिश में बहुगुणा को पूरी तरह कामयाबी हासिल हुई। हालांकि इसके बावजूद उनकी पार्टी से आस्था बरकरार रही। जिसके कारण उन्होंने प्रयास किया कि पार्टी उन्हें अपना ले। इसके लिए वे ऊपर के नेताओं से मिले और उनकी सहमति से सिकंदरा विधानसभा उपचुनाव में पार्टी उम्मीदवार के लिए काम भी किया। यह भी समझा जाता है कि सदर विधायक गौरीशंकर वर्मा और पार्टी का एक बड़ा वर्ग इस मामले में उनके साथ है।
भाजपा के हर कार्यक्रम में बहुगुणा ने शामिल होने का प्रयास किया। साथ ही प्रदेश अध्यक्ष सहित जो भी बड़ा नेता उरई आया बहुगुणा ने उससे मुलाकात की। माना यह जाने लगा था कि न तो बहुगुणा का निष्कासन हुआ है और न ही पार्टी ऐसा करने का इरादा रखती है। इसलिए पार्टी में उन्हें बनाये रखने का एलान औपचारिकता भर है जो किसी भी दिन हो जायेगा।
पर रविवार को जिलाध्यक्ष उदयन पालीवाल ने इस मामले में उन्हें जोरों का झटका दिया। जब उन्होंने कुछ पत्रकारों से अनौपचारिक चर्चा में कहा कि जिन लोगों ने पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ स्थानीय निकाय चुनाव में संघर्ष किया था उन्हें पार्टी में नही लिया जायेगा। जहां तक उन्हें निष्कासित न किये जाने की घोषणा का सवाल है बकौल बहुगुणा इसकी कोई जरूरत नही है। भाजपा के संविधान के मुताबिक बागी प्रत्याशी की सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाती है। उसके निष्कासन का कोई पत्र जारी किया जाये इसकी आवश्यकता नही है। खास बात यह है कि पालीवाल जब यह बता रहे थे तब सदर विधायक गौरीशंकर वर्मा भी वहां मौजूद थे।

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