उरई। बुंदेलखंड में पेयजल समस्या को लेकर प्रदेश सरकार कितनी गंभीर है इसका एहसास कुछ दिनों पहले हो गया था जब तीन मंत्रियों का अध्ययन दल यहा भेजा गया था जिसने अंचल भर के सांसद और विधायकों के साथ उरई में बैठक की थी। लेकिन जल प्रबंधन से जुड़े विभागों को सरकार की इस गंभीरता से कोई सरोकार नही है। बुधवार को जिलाधिकारी की बैठक में यह स्थिति उजागर होकर सामने आ गई जब उनके फोन को भी क्षेत्र में तैनात जल निगम के एक अवर अभियंता ने उठाना गंवारा नही किया।
कुछ दिनों पहले उरई में तीन मंत्रियों के उच्च स्तरीय अध्ययन दल ने बुंदेलखंड के पेयजल संकट पर बैठक की थी। इस बैठक में जल निगम और जल संस्थान के अभियंता हमेशा की तरह ज्यादा से ज्यादा बजट झटकने में तो सक्रिय रहे लेकिन उन्होंने अपनी जबावदेही की कोई चिंता नही की। अध्ययन दल के सामने हर क्षेत्र के विधायक ने बताया कि उनके यहां जो भी पेयजल परियोजना मंजूर हुईं थीं उनमें इस्टीमेट के बाद रिवाइज इस्टीमेट भी मंजूर करा लिया गया और इसके मुताबिक पूरा बजट भी हथिया लिया गया लेकिन फिर भी परियोजनाएं अधूरी पड़ी हैं। जिनका कोई लाभ लोगों को नही मिल पा रहा है। इसके बाद ही मालूम हो गया था कि अभियंताओं को चाहे जितना बजट दे दिया जाये लेकिन उनकी पूर्ति नही होगी। अभियंताओं को तो घर भर जायेगा लेकिन पेयजल संकट से पीड़ित लोग प्यास से बदस्तूर बेहाल बने रहेगें।
मंत्रियों के अध्ययन दल की बैठक के बाद सरकार के निर्देश पर इसके लिए प्रशासन में फालोअप चल रहा है। इसी क्रम में बुधवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जिलाधिकारी डा. अब्दुल मन्नान ने बैठक की जिसमें स्थानीय निकाय की मदों में पड़ी धनराशि को अपने खाते में स्थानांतरित कराने के लिए जल निगम के अभियंता बेहद बेसब्र दिखे। जबकि चेयरमैनों को इस पर आपत्ति थी। उनका कहना था कि जल निगम के पास एक तो अपना ही बजट पर्याप्त है। दूसरे उन्होंने रीबोर का ओवर बजट बना रखा है जबकि वे किफायत में काम करा सकते हैं।
इसी कहासुनी के बीच रामपुरा के जल निगम अवर अभियंता अभिषेक के रवैये का मामला सामने आया। बताया गया है कि जल संकट से लोगों को कैसे राहत दी जा सकती है जब वे चेयरमैन तक का फोन रिसीव नही करते। इस पर डीएम ने जल निगम के सहायक अभियंता से कहा कि वे फोन मिलाकर देखें। जब जल निगम के सहायक अभियंता की काल भी अवर अभियंता के मोबाइल पर रिसीव नही हुई तो इसकी पुष्टि हो गई। इसके बाद डीएम ने अपने बेसिक फोन से अवर अभियंता को काल कराई वह काल भी रिसीव नही हुई। काफी देर बाद जब अवर अभियंता ने अपने सहायक अभियंता के मोबाइल पर काल वापसी की तो डीएम ने उनका फोन अपने हाथ में ले लिया। डीएम ने अवर अभियंता से उसकी लोकेशन पूंछी तो उसने बताया कि वह उरई में है। इसके बाद डीएम का पारा चढ़ गया। उन्होंने सख्त लहजे में अवर अभियंता को हिदायत दी कि आइंदा जन सामान्य की भी काल रिसीव न हुई और आप अपने क्षेत्र में न पाये गये तो आपको बर्खास्त करा दूंगा। अभिषेक सहित जल निगम और जल संस्थान के सभी अभियंताओं की डीएम के तेवरों से कंपकंपी तो छूट गई लेकिन सभी जानते है कि वे गेंडे से भी ज्यादा मोटी खाल के हैं जिसके चलते शायद कुछ देर बाद वे डीएम की हिदायत को एक कान से सुनकर दूसरे कान से न निकाल डालें।

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