उरई। अपराधों की बढ़ोत्तरी पर पर्दा डालने के लिए थानों में अघोषित रूप से मुकदमे दर्ज न करने की नीति अपनाई जा रही है। यहां तक कि संगीन मामलों के मुकदमे भी दर्ज नही किये जाते। जबकि इलाहाबाद हाईकोर्ट पिछली सरकार में सख्ती से आदेश दे चुका है कि अपराध की हर तहरीर का पंजीकरण अनिवार्य रूप से किया जाये।
सरकार कोई भी हो लंबे समय से सभी की नीति अपराध दर्ज करने के मामले में एक जैसी है। आंकड़ों में अपराध घटाने के लिए हर सरकार पुलिस को ज्यादातर मामले न लिखने की शह देती है। यह नीति वर्तमान सरकार में भी बरकरार है। जालौन कोतवाली क्षेत्र के गांव कुसमरा में 9 मार्च की सुबह एक किशोरी का चार पहिया वाहन से अपहरण कर लिया गया।
किशोरी के पिता ने कस्बा जालौन के मोहल्ला फर्दनवीस निवासी मगनलाल उसके लड़के सूरज व भोला, भतीजा जितेंद्र व एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ थाने में तहरीर दी। लेकिन मुकदमा दर्ज नही किया गया। पीड़ित ने बाद में पुलिस क्षेत्राधिकारी जालौन संजय शर्मा से फरियाद की। लेकिन उनके आदेश के बावजूद भी आज तक मुकदमा दर्ज नही किया गया है।
कोड़ में खाज वाली बात यह है कि पीड़ित एक ईंट-भटटे पर मजदूरी करता है। जाहिर है कि उसकी सामाजिक, आर्थिक पृष्ठभूमि कमजोर है। जिसकी वजह से उसकी पैरवी भी दमदारी से नही हो पा रही। पीड़ित दर-दर भटक रहा है। न कोई उसका मुकदमा लिखवा पा रहा है और न ही उसकी पुत्री की सुरक्षा का कोई प्रयास किया जा रहा। इसे अमानवीयता की इंतहा कहा जा सकता है।







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