उरई। बुधवार को जिलाधिकारी आवास पर स्थानीय निकाय के अध्यक्षों की बैठक पेयजल संकट पर चर्चा के लिए आहूत हुई जो औपचारिकता में निपट गई। बैठक के बाद खीझें अध्यक्षों ने कहा कि इस तरह की खानापूर्ति समय की बर्बादी के अलावा कुछ नही है।
पेयजल व्यवस्था को गर्मियों में दुरुस्त रखने के नाम पर प्रशासन युद्ध स्तर पर बैठकें तो आयोजित करने में जुटा है लेकिन कोई सार्थक कदम नही उठाया जा रहा। बुधवार को समाज कल्याण अधिकारी ने जिलाधिकारी डा. मन्नान अख्तर द्वारा पेयजल संकट को लेकर अपने आवास पर आपात बैठक आहूत करने की जानकारी स्थानीय निकाय के अध्यक्षों को दी। कदौरा, कोटरा आदि सुदूर की नगर पंचायतों के अध्यक्षों को भी जिलाधिकारी के इस फरमान पर दौड़कर जिला मुख्यालय पर आना पड़ा। जबकि इसके कारण उनके तमाम जरूरी कार्य बाधित हो गये।
लेकिन बैठक खोदा पहाड़ निकली चुहिया साबित हुई। केवल 10 मिनट में औपचारिकता करके बैठक खत्म कर दी गई। जिससे अध्यक्षों ने अपने को ठगा महसूस किया। उन्होंने कहा कि इससे तो अच्छा था कि किसी अधिकारी से टेलीफोन कराकर उन्हें क्या करना है यह बता दिया जाता तो उन्हें बैठक के लिए अन्य महत्वपूर्ण कार्य तो नही छोड़ने पड़ते। अध्यक्षों का कहना था कि अगर इस तरह बैठकें हुईं तो पेयजल संकट से लोगों को राहत देने का वास्तविक कार्य शायद ही हो पाये।







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