उरई। रामपुरा थाना क्षेत्र के सिंध नदी के तट स्थित सिद्धपुरा व बिल्हौड़ गांव में धड़ल्ले से बालू का अवैध खनन चल रहा है। सूत्रों की मानें तो पुलिस-प्रशासन की मिलीभगत से बालू खनन का अवैध कारोबार चल रहा है। इससे करोड़ों के राजस्व का नुकसान हो रहा है। साथ ही रामपुरा मध्यप्रदेश से भी आ रही बालू का मुख्य केंद्र बिंदु बन गया है।

आदेशों की सरेआम उड़ाई जा रही धज्जियां
एनजीटी व सुप्रीम कोर्ट के साथ सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ई-टेंडर प्रक्रिया की भी सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यहां मशीनों द्वारा लोग सिंध, यमुना नदी के बालू का खनन कर उसे बेच मालामाल हो रहे हैं और सरकार के राजस्व को चूना लगा रहे हैं।

मनमाने रेट में बेच रहे बालू
न कोई रोक और न ही प्रशासन का खौफ, बालू माफिया दिन में घूमकर जरूरतमंदों से भाव तय कर पांच हजार से छह हजार रुपया प्रति ट्राली बालू बेच रहे हैं। रामपुरा विकास खंड के प्रमुख गांवों में रात 11 बजे से शुरू होकर भोर होने तक अवैध खनन का खेल चलता रहता है। खनन करने वाले माफियाओं के पास खुद की जेसीबी मशीन, ट्रक, डंपर व ट्रैक्टर-ट्राली है।

खनन के खिलाफ बोलने वालों को दी जाती है धमकी
इस धंधे के खिलाफ आवाज उठाने वालों को खनन माफियाओं द्वारा डराया धमकाया जाता है और यदि वे लोग पुलिस के पास आते है तो उन्हें पुलिस डांटकर वहां से भगा देती है। ऐसे में लोगों का आरोप है कि पुलिस व प्रशासन की मिलीभगत से अवैध बालू खनन का कार्य जोरों पर चल रहा है। यह देखना होगा कि उच्च अधिकारी इस पर क्या संज्ञान लेते है और स्थानीय पुलिस पर क्या कार्यवाही की जाती है।

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